पेपर लीक मामला: कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्रियों को जल्द रिपोर्ट देने का दिया निर्देश; खबर जिन्दगी पर 1991 से अबतक का पूरा ब्यौरा

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नई दिल्ली/खबर जिन्दगी: भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और कदाचार सहित अन्य अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस अब केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने की तैयारी में है। इस के लिए पार्टी ने अपने शासन वाले राज्यों की परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। कांग्रेस ने सारे मुख्यमंत्रियों से स्पष्ट कैलेंडर, परीक्षा सुरक्षा और व्यवस्था में सुधार के लिए उपाय करने की बात कही है। वही खबर जिन्दगी के पास 1991 से 2026 तक पेपर लीक से लेकर कदाचार तक की पूरी जानकारी उपलब्ध है 

लेकिन सबसे पहले बात करेंगे कांग्रेस की जिन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के बाद पार्टी ने अपने चार मुख्यमंत्रियों से शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने और रिपोर्ट देने को कहा। कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने मुख्यमंत्रियों से एक महीने के भीतर ठोस योजनाएं तैयार करने को कहा है।

BJP को घेरने से पहले खुद का “घर सुधार प्लान

कांग्रेस पिछले कुछ समय से लगातार किसी न किसी मामले को लेकर आंदोलन करती रही है। अब उसने पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलना शुरू किया है। पार्टी ने जून में ‘छात्रों की गूंज’ नाम से देशव्यापी अभियान शुरू किया था। अब CWC ने इस अभियान को 800 शहरों तक ले जाने का फैसला किया है।

ऐसे में पार्टी के सामने एक राजनीतिक चुनौती भी है कि जिसके घर खुद शीशे के हों वह दूसरों पर पत्थर नहीं उछाला करते। जिन मुद्दों को लेकर कांग्रेस केंद्र की सरकार को घेर रही है, अगर उसी तरह की कोई बड़ी परीक्षा संबंधी गड़बड़ी उसके अपने शासन वाले राज्य में सामने आती है, तो विपक्ष कांग्रेस पर हमलावर हो जाएगा। इसी वजह से पार्टी ने अपने राज्यों की परीक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से तैयारी शुरू करने का फैसला किया है।

कांग्रेस शासन वाले राज्यों से मांगी गई रिपोर्ट

कांग्रेस ने अपने चार राज्यों हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के मुख्यमंत्रियों से शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को लेकर सुधार की विस्तृत योजना तैयार करने को कहा है। पार्टी चाहती है कि इन राज्यों में शिक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसा रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें अकादमिक परीक्षाओं और सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिए स्पष्ट कैलेंडर, परीक्षा सुरक्षा और व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे शामिल हों।

परीक्षा कैलेंडर पर विशेष जोर

कांग्रेस परीक्षाओं की तारीखों में बार-बार बदलाव, भर्ती प्रक्रिया में देरी और पेपर लीक, कदाचार और परीक्षा रद्द जैसे मामलों को कम करने के लिए अकादमिक और सरकारी परीक्षाओं का व्यवस्थित कैलेंडर तैयार करने पर जोर देने को कहा है। इससे अभ्यर्थियों को पहले से पता रहेगा कि कौन-सी परीक्षा कब होगी और भर्ती प्रक्रिया किस समयसीमा में आगे बढ़ेगी।

पेपर लीक का मुद्दा पुराना, सुधार अबतक नहीं

भारत में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और अनियमित होने का विवाद सिर्फ हाल के वर्षों तक सीमित नहीं है। 1990 के दशक से लेकर 2014 तक UPSC, CBSE, मेडिकल इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं जैसे कि-AIPMT/PMT, AIIMS AIEEE और कई राज्य स्तरीय परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक या परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की खबरें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।

1991 में देश की सर्वोच्च प्रतियोगिता परीक्षा UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। वहीं 2004 में सीबीएसई (CBSE) ऑल इंडिया पीएमटी (PMT) का पेपर लीक, 2006 में एम्स (AIIMS) पीजी प्रवेश परीक्षा और सीबीएसई 12वीं (बिजनेस स्टडीज/अकाउंटेंसी) का पेपर लीक, 2007 में AIEEE और 2011 में दुबारा पेपर लीक हुआ था, वहीं आईसीएआई (ICAI) सीपीटी परीक्षा के पेपर भी लीक हुए थे।

इसके अलावा 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)अजमेर और इलाहाबाद जोन की असिस्टेंट स्टेशन मास्टर (ASM) और कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के पेपर लीक होने का मामला भी चर्चा का विषय रहा। फिर से कांग्रेस के शासनकाल में 2012 और 2013 में फिर से एम्स प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक हुआ। इसके अलावा राजस्थान की राज्य स्तरीय सर्वोच्च परीक्षा राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) और राजस्थान यूनिवर्सिटी के परीक्षा प्रश्नपत्र लीक हो गए थे। इसके बाद के सालों में कर्नाटक और राजस्थान मे परीक्षा को लेकर कई अनियमितताएं सामने आई।

इन घटनाओं को लेकर परीक्षा रद्द करने, दोबारा परीक्षा कराने और जांच जैसे कदम भी अलग-अलग मामलों में उठाए गए। हालांकि, बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के यह दावा नहीं किया जा सकता कि “कांग्रेस शासनकाल में इतने पेपर लीक हुए”। इसे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता।

2014 के बाद की परीक्षा को लेकर चुनौती

2014 के बाद केंद्र और विभिन्न राज्यों में परीक्षा संबंधी विवादों के कई मामले सामने आए। NEET-UG, UGC-NET, पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक या अनियमितताओं के आरोपों ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।

The Indian Express ने 15 राज्यों में 5 बर्षों के भर्ती परीक्षाओं से जुड़े 41 पेपर लीक मामलों की पड़ताल कर 2024 में एक रिपोर्ट जारी किया था। रिपोर्ट के अनुसार इन मामलों से लगभग 1.4 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे।

इससे यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि इस समस्या को केंद्र बनाम विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई के रूप में देखने के बजाय परीक्षा व्यवस्था की संरचनात्मक कमजोरी के रूप में भी देखने की जरूरत है।

पेपर लीक पर केंद्र सरकार ने बनाया कानून

पेपर लीक और अनियमितताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2024 में पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 लागू किया है। यह कानून 21 जून 2024 से प्रभावी हुआ और सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, अनुचित साधनों तथा संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर दंड का प्रावधान करता है।


सवाल सिर्फ कांग्रेस Vs BJP की राजनीति का नहीं

पेपर लीक का राजनीतिक हिसाब लगाने की कोशिश लगातार होती रही है। MP कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी शासनकाल में 85 पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने का आरोप लगाया है। वही बीजेपी की तरफ से कांग्रेस शासनकाल के दौरान इस तरह की लगभग 150 घटनाओं का जिक्र किया है। राजनीतिक स्तर पर एक पक्ष दूसरे पक्ष के शासनकाल के मामलों को गिनाता है, जबकि दूसरा पक्ष अपने कार्यकाल के मामलों का बचाव करता है।

और इन सब में पिसता है वह अभ्यर्थी, उसके सपने, उसका भविष्य जो उसे अपने जीवन को बेहतर करने की दिशा में अग्रसर होता है। पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द होती है तो सबसे ज्यादा नुकसान उस छात्र या नौकरी की तैयारी कर रहे उस अभ्यर्थी को होता है जिसने महीनों या वर्षों तक तैयारी की होती है। दोबारा परीक्षा का मतलब फिर से तैयारी, यात्रा, आर्थिक खर्च और मानसिक दबाव है। इसलिए परीक्षा सुधार के लिए केवल कड़े कानून पर्याप्त नहीं हैं। परीक्षा की अधिसूचना से लेकर प्रश्नपत्र तैयार होने की सारी व्यवस्था, परीक्षा स्थल की कार्यवाही  डिजिटल सिस्टम, CCTV निगरानी, सर्वर सुरक्षा और परीक्षा के बाद जांच की पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय करनी होगी।

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