
नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी सहमति, टैरिफ विवाद भी घोषणापत्र में शामिल
नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 के दौरान भारत मंडपम में सदस्य देशों के बीच नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर आम सहमति बनी। सम्मेलन के दौरान वैश्विक व्यापार, एकतरफा टैरिफ, अंतरराष्ट्रीय विवादों और BRICS देशों के बीच भुगतान व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत की अध्यक्षता में साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
एकतरफा टैरिफ पर जताई गई चिंता
नई दिल्ली घोषणापत्र में एकतरफा तरीके से टैरिफ बढ़ाने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की गई। BRICS देशों ने इस तरह की व्यापारिक नीतियों के वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अपना रुख सामने रखा और WTO के नियमों के अनुरूप बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया।
युद्ध और अंतरराष्ट्रीय विवादों पर कूटनीति का जोर
घोषणापत्र में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई। सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई।
BRICS देशों ने वैश्विक मुद्दों पर ऐसा बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसमें अलग-अलग देशों के हितों और दृष्टिकोण का सम्मान हो।
BRICS देशों के बीच भुगतान व्यवस्था पर जोर
BRICS के भीतर व्यापार को आसान बनाने के लिए भुगतान व्यवस्था से जुड़े व्यावहारिक समाधानों पर भी चर्चा हुई। समूह के देशों के बीच व्यापारिक लेन-देन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
घोषणापत्र को लेकर बातचीत सम्मेलन के अंतिम चरण तक जारी रही। BRICS में निर्णय आम सहमति के आधार पर लिए जाते हैं, इसलिए सभी सदस्य देशों के बीच सहमति बनना महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घोषणापत्र?
भारत की अध्यक्षता में साझा घोषणापत्र पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव, युद्ध और भू-राजनीतिक चुनौतियां लगातार चर्चा में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समापन सत्र में कहा कि बदलती दुनिया को पुरानी पड़ चुकी संस्थाओं के जरिए नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।
मोदी ने यह भी कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ को भविष्य की तकनीकों के विकास और उन्हें संचालित करने वाले नियमों में समान भागीदारी मिलनी चाहिए।
पिछली बैठक से इस बार की स्थिति अलग
BRICS की पिछली विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान सदस्य देशों के बीच मतभेदों के चलते संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका था। ऐसे में इस बार नई दिल्ली घोषणापत्र पर आम सहमति बनना भारत की कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, इसे किसी एक देश की व्यक्तिगत जीत के बजाय BRICS के भीतर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया और भारत की अध्यक्षता में हुए कूटनीतिक प्रयासों के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।
सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हुए?
BRICS Summit 2026 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत सदस्य देशों के प्रमुख नेता शामिल हुए।
नई दिल्ली घोषणापत्र के जरिए BRICS ने वैश्विक व्यापार, बहुपक्षीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को लेकर अपने सामूहिक रुख को सामने रखा है। भारत के लिए इसे अपनी अध्यक्षता के दौरान सदस्य देशों के बीच सहमति कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।










