
सिकंदराबाद कैंट की आर्मरी से 12 हथियार और गोला-बारूद गायब होने की जांच तेज
सिकंदराबाद: तेलंगाना के सिकंदराबाद कैंट से भारतीय सेना की आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद गायब होने के मामले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 मद्रास रेजिमेंट की एक यूनिट से जुड़े इस मामले में सेना और तेलंगाना पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी से पूछताछ के साथ-साथ आर्मरी के रिकॉर्ड और हथियारों के हिसाब-किताब की भी गहन जांच की जा रही है।
मामला का खुलासा तब हुआ जब 31 अगस्त की सुबह करीब 7:50 बजे आर्मरी से जुड़े एक अधिकारी ने बोल्लाराम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता अधिकारी ने बताया कि जब वह हथियारों और गोला-बारूद रखने वाली जगह का निरीक्षा करने गया तो वहां के ताले टूटे मिले और रिकॉर्ड में दर्ज कुछ सामान मौके पर उपलब्ध नहीं था।
12 हथियार समेत बड़ी मात्रा में गोला-बारूद गायब
पुलिस की जांच में अब तक 12 हथियारों के गायब होने की बात सामने आई है। इनमें चार AK-203 असॉल्ट राइफल, सात पिस्टल और एक INSAS राइफल शामिल बताई गई है। इसके अलावा 1,000 से अधिक राउंड गोला-बारूद और पैसिव नाइट-विजन बाइनोकुलर्स की एक जोड़ी भी गायब मिली है। हथियारों और गोला-बारूद की प्रकृति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से ले रही हैं।
आर्मरी के रिकॉर्ड ने बढ़ाई जांच की मुश्किल
अब तक के जांच में एक अहम बिंदु आर्मरी के रिकॉर्ड से खिलवाड़ करने की बात सामने आ रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, हथियारों से संबंधित बही-खाते या रजिस्टर कई महीनों से नियमित रूप में व्यवस्थित तरीके से मेंटेन नहीं किए गए थे। यही वजह है कि जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि हथियार वास्तव में 30 और 31 अगस्त की दरम्यानी रात गायब हुए या उससे पहले ही रिकॉर्ड से बाहर हो चुके थे।
आखिरी बार 30 अगस्त की शाम हुई थी गिनती
बताया गया है कि हथियारों और गोला-बारूद की आखिरी भौतिक गिनती 30 अगस्त को शाम करीब 6 बजे की गई थी। इसके बाद संबंधित स्टोर और मैगजीन को बंद कर दिया गया था। शुरुआत में यह आशंका जताई जा रही है कि चोरी इसी रात के बाद हुई होगी। हालांकि, रिकॉर्ड में अनियमितता सामने आने के बाद जांच अधिकारी अब इससे पहले की अवधि को भी खंगाल रहे हैं।
सुरक्षा गार्डों के बयान भी जांच के दायरे में
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, आर्मरी की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात रहते हैं। गार्डों ने किसी सेंधमारी या संदिग्ध गतिविधि को देखने से इनकार किया है। सामान्य तौर पर आर्मरी में मौजूद हथियारों का नियमित हिसाब-किताब किया जाना जरूरी माना जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड में हथियारों और गोला-बारूद की कमी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
वरिष्ठ अधिकारी से पूछताछ, जांच का दायरा बढ़ा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 20 मद्रास रेजिमेंट की संबंधित यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी से सेना के अधिकारियों के साथ-साथ तेलंगाना पुलिस ने भी पूछताछ की है। पूछताछ का एक प्रमुख पहलू आर्मरी के रिकॉर्ड और हथियारों की निगरानी व्यवस्था से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि इस पूछताछ से अबतक किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका या कोई संदेहास्पद स्थिति अब तक नहीं आई है।
अब इन सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसियां
अब जांच एजेंसिया इन सवालों को खोजने में लगी है कि हथियार वास्तव में कब गायब हुए होंगे। आर्मरी के रिकॉर्ड की नियमित जांच या हथियारों की एंट्री रजिस्टर में कब से नहीं की गई है। ताले टूटने की घटना और हथियारों के गायब होने को लेकर गार्ड के बयानों का सत्यापन भी जांच के दायरे में आया है, और इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हथियार और गोलाबारूद गायब कैसे हुए।
फिलहाल सेना और तेलंगाना पुलिस रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था, संबंधित कर्मचारियों के बयान और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। साथ ही जांच का दायरा इस बात पर भी है यह हथियार अगर कैंटोनमेंट क्षेत्र से निकल कर किसी असामाजिक तत्व या अपराधियों के हाथों में तो नहीं लग गए।










