पिछले एक साल में जापान में जनसंख्या लगभग 9 लाख घट गई है। जिसके कारण जापान में जनसंख्या संकट गहराता जा रहा है। कभी तकनीक के कारण दुनिया में अपनी पहचान बनाने और राज करने का सपना देखने वाला यह देश आज जनसंख्या में कमी होने की समस्या से गुजर रहा है।
बिहार से जापान को क्यूं जोड़ा वो आगे बताएंगे। फिलहाल जापान की आबादी 12.50 करोड़ है। और बिहार की आबादी भी लगभग इतनी ही है पिछले 1 साल में जहां जापान की आबादी लगभग 9 लाख घटी है। वहीं बिहार की आबादी लगभग 9 लाख के आस पास बढ़ी है।
जापान के 12.50 करोड़ की आबादी वाले देश में अगर 9 लाख की जनसंख्या कम हो जाए तो ये बहुत ही गंभीर मसला है। पैदा होने वाले और मौत होने वाले जनसंख्या के बीच 9 लाख का अंतर मतलब 1 प्रतिशत से .3 प्रतिशत कम यानि 0.7 प्रतिशत की कमी किसी भी कम जनसंख्या वाले देश के लिए सिर दर्द का सबब हो सकता है।जापान पिछले कई वर्षों से जनसंख्या गिरावट की मार खेल रहा है।
अब बताते है कि यहां बिहार का जिक्र क्यूं किया था। बिहार का बहुसंख्यक भी कुछ जापान के अनुसार ही चलने की कोशिश कर रहा है। इसने अपनी जनसंख्या घटा कर 0.6 प्रतिशत कर दिया है। वही दूसरे 0.9 प्रतिशत से आगे बढ़ रहा है। जापान में में तो एक ही धर्म को दो तरीके से मानने वाले लोग हैं लेकिन भारत और बिहार के साथ ऐसा नहीं है। भारत और बिहार में जापान जैसे स्थिति का होने का मतलब होगा, एक धर्म का खत्म होना और दूसरे धर्म का आगाज।
2-2 बार परमाणु बम की मार झेलने वाला जापान आज जनसंख्या की कमी का मार झेल रहा है। परमाणु बम के हमलों से ही जापानियों ने खुद को तकनीक का राजा बना दूसरे देशों पर राज करने का सपना देखा था। लेकिन युवा दिमाग अब बुद्ध हो चला है और सपनों के पीछे भागते इन बुद्धों को जनसंख्या को लेकर कभी ये अहसास नहीं हुआ कि जनसंख्या की कमी की विकरालता देश के युवा धन में कमी ला सकती है। वहीं जापान सरकार ने जनसंख्या बढ़ाने के लिए कई सारे उपाय करने शुरू किए हैं तो शायद भविष्य में जापान की जनसंख्या में कोई सकारात्मक सुधार हो।








