2021 का वह मामला जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने सारे सबूतों और गवाहों को एक तरफ रख सिक्स सेंस के इस्तेमाल से दो परिवारों को आमने-सामने कर अदालत ने दुर्लभ फैसला सुनाया जिसने दो जिंदगियों को जीवन भर के लिए मिला दिया।
मामला मध्यप्रदेश के सागर का है जहां 2015 में सोशल मीडिया की जानपहचान बाद में व्यक्तिगत मुलाकातों में बदल गई। फिर दोनों का प्रेम परवान चढ़ा और दोनों के बीच आत्मीय संबंध बन गए। 2021 में लड़की ने शादी का प्रस्ताव रखा जिसे लड़के ने इंकार कर दिया। विवाह न हो पाने पर लड़की ने लड़के के खिलाफ धारा 376 और 376 (2)(n) तहत मुकदमा दर्ज करा दिया। मामला ट्रायल कोर्ट पहुंचा जहां लड़के के ऊपर दोषसिद्ध कर आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। आरोपी ने इसके खिलाफ हाइकोर्ट में अपील दायर की लेकिन राहत नहीं मिलने पर आरोपी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सारे सबूतों और गवाहों को देखते हुए माना कि मामला सहमति से बने रिश्ते का था, जिसे गलतफहमी के कारण आपराधिक रंग दे दिया गया। इन्होंने अपने फैसले में कहा कि खुद की सिक्स सेंस का इस्तेमाल करते हुए दोनों पक्षों और उनके परिजनों को सामने कर व्यक्तिगत रूप बातचीत की और उनके केस की प्रकृति को समझने की कोशिश की। असल में दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन शादी की तारीख बार बार टलने से अभियोजिका के मन में एक डर का भाव उत्पन्न हुआ जिसे आपराधिक स्वरूप के रूप में दर्ज कराया गया।
पीठ ने बताया कि बातचीत के दौरान दोनों ने शादी की इक्षा जताई जिसे उनके माता-पिता ने भी स्वीकृति दी, जिसकी कोर्ट ने अनुमति दी। जुलाई में इनकी शादी हुई इसके बाद कोर्ट ने 6 महीने तक इसकी निगरानी की। जब दोनों पति पत्नी और उनके परिजनों ने कोर्ट को बताया कि इन 6 महीनों में दोनों खुशहाल जीवन जी रहे हैं और परिवारों के बीच के रिश्ते भी अच्छे हैं। तब पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर फैसला सुनाते हुए आरोपी के 10 साल के कठोर कारावास की सजा को खत्म कर दिया। साथ ही मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पताल में उसकी नौकरी फिर से बहाल कर दी गई। और निलंबन के अवधि का पूरा वेतन भुगतान करने का आदेश दिया।








