थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए सामाजिक कार्यों में सक्रिय
थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी जो कि वंशानुगत है, यह एक पीढी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होता रहता है। इसमें जीवित रहने के लिए प्रतिमाह रक्त चढ़वाना पड़ता है। इसी थैलेसीमिया रोग से जूझने वाले बीमारों के लिए दिव्यांश मेहरोत्रा रौशनी के किरण की तरह हैं।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए अल्पायु से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय दिव्यांश मेहरोत्रा ने मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। रक्त की कमी को देखते हुए दिव्यांश ने प्रशासन और चिकित्सा विभाग से संवाद किया। उन्होंने SP, DSP, सर्जन और मेडिकल स्टाफ से भेंट कर समस्या के समाधान के लिए निरंतर पहल की।
इसी क्रम में आज मेडिकल कॉलेज में SP मुजफ्फरपुर के निर्देश पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कराया गया। शिविर की शुरुआत स्वयं SP मुजफ्फरपुर ने रक्तदान कर शुरुआत किया। उन्होंने दिव्यांश की प्रशंसा करते हुए कहा कि “इतनी कम आयु में दिव्यांश ने अकेले इतना बड़ा कार्य किया है, यह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।”
शिविर में पुलिस कर्मियों, नागरिकों और मेडिकल टीम के सदस्यों ने बड़ी संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान किया। मेडिकल स्टाफ पूरी तत्परता के साथ सेवा में जुटा रहा।
दिव्यांश की प्रेरणा से थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में रक्त की कमी उनके इलाज में बाधा नहीं बनेगी।








