मात्र 9 साल की बच्ची अमायरा को स्कूल में अपने साथ पढ़ने वाले छात्रों से इतना कुछ सहना पड़ा कि उसने अपनी जान दे दी। सीबीएसई रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिसमें कहा गया है कि अमायरा 45 मिनट के अंदर 5 बार टीचर से मिली थी। लेकिन टीचर ने ध्यान नहीं दिया और अंततः इस मासूम की जान चली गई।
जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल के क्लास 4 के अमायरा की मौत ने उसके परिवार पर जैसे सितम का पहाड़ टूट पड़ा है। एक हंसता खेलता परिवार आज दुखों का साये में जी रहा है। CBSE के रिपोर्ट आने के बाद अमायरा के पिता विजय ने कहा कि अब सिस्टम के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ी जाएगी। जब तक नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द नहीं होगी तब तक बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए जो भी करना होगा किया जाएगा।
जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में 9 साल की छात्रा अमायरा मौत मामले में CBSE ने अपनी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। CBSE की रिपोर्ट के मुताबिक, अमायरा को पिछले डेढ़ सालों से उसके सहपाठियों द्वारा परेशान किया जा रहा था। साथ में पढ़ने वाले अन्य छात्र अमायरा से मारपीट करते थे, साथ ही उसके पहनावे और पढ़ाई पर छींटाकसी भी करते थे। कक्षा 4 के अन्य छात्रों द्वारा उसके बारे में गलत गलत बातें फैलाई जा रही थी।
25 जुलाई 2024 को लगभग डेढ़ साल पहले एक छात्र ने अमायरा पर हाथ उठाया था। जिसे अमायरा ने अपने पेरेंट्स को बताया था। जिसका ऑडियो प्रूफ के साथ शिकायत की गई थी। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया। इसके उलट PTM (parents-Teacher meeting) में प्रबंधन की तरफ से ये जवाब दिया गया कि “अमायरा को adjust करना चाहिए।”
इधर 10 अक्टूबर को क्लास में उसके बारे में गलत अफवाह फैलाई गई।क्लास के अन्य बच्चे उसे चिढ़ाने लगे। अमायरा 45 मिनट के अंदर 5 बार टीचर से मदद मांगे गई लेकिन टीचर ने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया। ये सारी बातें सीबीएसई की जांच के दौरान टीचर ने कबूली।
ये कोई पहला मामला नहीं है। इस तरह की खबरें आए दिन अखबार और न्यूज चैनलों की सुर्खियां बनती रही हैं।इस घटना ने पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है कि स्कूलों की कार्यविधि और शिक्षा की नीति कैसी होनी चाहिए।








