2025 में भारतीय रेलवे ने महाकुंभ, होली, गर्मी और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहारों व छुट्टियों के लिए 43,000 से ज्यादा विशेष ट्रेनें चला रेलवे ने एक नया कीर्तिमान बनाया है। बिना किसी किंतु परन्तु के कहें तो यह रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
जहां हर साल छठ और होली में बिहार आने के लिए यात्रियों की संख्या में भाड़ी इजाफा होता है और इस भीड़ को संभालना एक बड़ा टास्क होता है। उसमें रेलवे ने महापर्व छठ के लिए 1 अक्टूबर 2025 से 30 नवंबर 2025 तक के बीच 12383 ट्रेनें रेलवे ने भारत के दूसरे राज्यों से बिहार तक दौराई जिससे लगभग 65 लाख से ज्यादा लोगों ने यात्रा किया। ये आंकड़ा आरक्षण और सामान्य श्रेणी दोनों को मिलाकर है। निसंदेह रेलवे का यह कार्य काबिलेतारिफ है और रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि भी कही जाएगी।

बहरहाल अब हम किराए और रेलवे को फायदे की बात करें तो यहां स्पेशल ट्रेन का किराया रेगुलर किराए से 30 प्रतिशत से ज्यादा लगता है। लोगों को अधिक भुगतान कर गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए व्यय करना पड़ता है। तो एक बड़ा सवाल ये आता है कि जब स्पेशल ट्रेन के नाम पर इतनी सारी ट्रेनें चलाई जा रही हैं तो इसे रेगुलर ट्रेन के समान क्यूं नहीं चलाया जा सकता, जिससे ट्रेन में यात्रियों की यात्रा भीड़-भाड़ रहित सुगम और सुरक्षित हो। और यात्रियों को पैसे भी ज्यादा नहीं खर्च करना पड़े। क्या रेल मंत्रालय ऐसी व्यवस्था कर सकता है।








