ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन के निर्देश पर बिहार के ज्वेलरी की दुकानों में सुरक्षा के मद्देनजर बुर्का, नकाब या हेलमेट पहनकर आने वालों पर पाबंदी लगाई जा रही है। और ऐसा दुकानों के बाहर भी पोस्टर लगा कर लोगों से अपील भी की गई है।
लूटपाट और चोरी के मामलों को देखते हुए ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन के आदेश के बाद सर्राफा दुकानों में चेहरा ढकने पर रोक लगाने की शुरुआत सबसे पहले उत्तरप्रदेश के झांसी मे देखने को मिला।
झांसी के सीपरी सर्राफा बाजार में सुरक्षा के मद्देनजर सर्राफा व्यापारियों ने बड़ा फैसला लिया है। झांसी में अब जेवरात खरीदने के लिए ग्राहकों को दुकान के अंदर चेहरा छुपाने के किसी भी तरीके पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है।
सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सर्राफा व्यापारियों ने हर दुकान पर इसको लेकर पोस्टर भी लगाए हैं। इन पोस्टर में ग्राहकों से अनुरोध किया गया है कि दुकान के अंदर चेहरा खुला रखकर खरीददारी करें। इन पोस्टर्स पर सीपरी थाना प्रभारी की मुहर के साथ-साथ सीपरी सराफा व्यापार मंडल के अध्यक्ष की भी मुहर लगा हुआ है।
अब इसकी आंच बिहार तक पहुंच चुकी है। बिहार की सर्राफा दुकानों में भी हिजाब, नकाब, बुर्का या घूंघट पहनकर आने वाली महिलाओं को प्रवेश देने पर रोक लगायी है। साथ ही मुरेठा, हेलमेट या गमछा पहनकर आने वाले पुरुषों को भी दुकानों में एंट्री नहीं दी जा रही है।
सर्राफा व्यापारियों के मुताबिक गहनों की दुकानों में सीसीटीवी कैमरा लगा होता है लेकिन चेहरा अधिक ढके होने के कारण पहचानना मुश्किल होता है। इसके कारण सीसीटीवी फुटेज भी बहुत मददगार साबित नहीं हो पाता है। यह निर्णय सिर्फ सुरक्षा कारणों से निर्णय लिया गया है। इसे कोई धर्म या जाति से जोड़ कर न देखा जाये।
लेकिन यह निर्णय अल्पसंख्यक मतावलंबियों को नागवार गुजरा। जिसके बाद बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने इस फैसले पर सख़्त संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है। साथ ही संविधान की धारा अनुच्छेद 19(ए) और 21 का खुला उल्लंघन बताया है।








