
पियवा जात बाड़ पुलिस के बहेलिया में….
राजा हम दिहबो तोहरे पर जान… जैसे गीतों को अपना स्वर और मंचो पर गानों से अभिनय कौशल बिखेरने वाली बिजली रानी भोजपुरिया संगीत और समाज को अलविदा कह गईं।
रोहतास ज़िले के नटवार की रहने वाली 70 वर्षीय बिजली रानी का निधन शुक्रवार की रात उनके आवास नटवार में हो गया। वे किडनी की बिमारी से काफी दिनों से जूझ रही थीं। हाल के महीने में भोजपुरी कलाकार पवन सिंह ने उन्हें लखनऊ बुलवाकर इलाज करवाया था। पवन सिंह उन्हें “चाची” कहा करते थे और उनके प्रति बेहद श्रद्धा रखते थे।उनका जन्म 1955 में बिक्रमगंज के नटवार गांव में हुआ था। अपने जीवन के आखिरी वर्षों में बीमारी और आर्थिक संकटों से जुझ रहीं थीं। दोनों किडनियां जवाब दे चुकी थी।
1980-90 के दशक में भोजपुरी मंचों की शान और प्रतिष्ठित नाम रही हैं। उनका नाम सुनते ही लोग उमड़ आते थे। जैसे संगीत का कोई उत्सव होने जा रहा हो। उनके कार्यक्रम लोकप्रियता की मिसाल थे।लोग कहते थे “जहाँ बिजली रानी हैं, वहाँ महफ़िल में रोशनी है।” मंच पर एक साथ गायन, अभिनय और नृत्य का संगम होता था। जिससे काफी लोग पंसद करते थे। भोजपुर, सासाराम आरा बक्सर शाहाबाद और मगध सहित भोजपुरी बोलने वालों में उनके चाहने वालों की तादाद बेहिसाब थी। शादियों, मेले और स्टेज शो में उनके बिना कोई कार्यक्रम मुकम्मल नहीं माना जाता था। उनकी परफॉर्मेंस इतनी लोकप्रिय थी कि पैसे वाले घरों के आयोजन में ही उनकी अदाकारी और जलवे दिखते थे।
लोग कहते हैं, शादी की तारीख़ें पहले बिजली रानी से पूछकर तय होती थी। उन्हीं की उपलब्धता पर मुहर लगती थी।
उन्होंने कई भोजपुरी फिल्मों और म्यूज़िक वीडियो में अपनी छाप छोड़ी। उनकी गायकी ने भोजपुरी लोक-संगीत को अपनी मिट्टी की सुगंध को बरकरार रखने में मदद की। वे सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि उस दौर की मंच की मालकिन थीं। उनकी कला में लोक और लय का ऐसा संगम था जो सीधे दिल में उतरता था।
किडनी खराब होने के चलते उनके जीवन के अंतिम समय जरूर कठिन रहे। मगर अंतिम सांस तक मंच के प्रति वही मोह, वही जज़्बा झलकता रहा। शनिवार को नटवर गांव में जब उनकी शवयात्रा निकली, तो पूरा इलाक़ा नम आँखों से उन्हें विदा कर रहा था। उनकी बेटी रेखा रानी अंत तक उनके साथ रहीं।








