
बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति और डेयरी प्रौद्योगिकी के जाने-माने विशेषज्ञ प्रो. दिनेश चंद्र राय ने असम के डेयरी क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट और लाभकारी रोडमैप प्रस्तुत किया है। राज्यपाल द्वारा आयोजित दो दिवसीय महत्वपूर्ण कॉन्क्लेव में एक महत्वपूर्ण सत्र का नेतृत्व करते हुए असम में डेयरी उद्योग के संवर्धन की संभावनाओं पर कहा कि असम दूध की कमी वाले पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार जैसे दूध की कमी वाले पड़ोसी देशों की सीमा के नजदीक होने का लाभ ले सकता है।उन्होंने सभी हितधारकों से दूध के उत्पादन पर केंद्रित रहने के बजाय, उच्च-लाभ, मूल्यवर्धित उत्पादों और रणनीतिक उद्यमिता की ओर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
प्रो. राय, कुलपति के साथ साथ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक वरिष्ठ प्रोफेसर भी हैं।इन्होंने ‘डेयरी टेक्नोलॉजी, प्रोसेसिंग एवं स्टार्ट-अप्स’ पर हुए सत्र के संयोजक के रूप में अपनी बात रखी। उन्होंने राजभवन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा, असम केवल एक प्रगतिशील डेयरी अर्थव्यवस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह एक अतुलनीय सांस्कृतिक विरासत और असाधारण रूप से समृद्ध पारंपरिक ज्ञान का भंडार भी है।
प्रो. राय ने ज़ोर देकर कहा कि पहला और अनिवार्य कदम स्वच्छ दूध उत्पादन सुनिश्चित करना है। इसके लिए सहकारी स्तर पर आधुनिक शीतलन और गुणवत्ता परीक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है।
कुलपति ने सम्मेलन के दौरान राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य से मुलाकात पर कहा कि गवर्नर आचार्य जी का सहज और सरल व्यक्तित्व और उनका स्नेहपूर्ण व्यवहार अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने विशेष कार्य पदाधिकारी और पूर्व कुलपति प्रो बेचन लाल की डेयरी सम्मेलन के आयोजन में मुख्य भूमिका के लिए सराहना करते हुए कहा कि इस सम्मेलन में विशेषज्ञों के विमर्श से असम के डेयरी सेक्टर को उल्लेखनीय लाभ होगा। इस सम्मेलन के दौरान माँ कामाख्या देवी के दर्शन का भी सुअवसर प्राप्त होने को अपना सौभाग्य बताते हुए प्रो राय ने इसे अपने लिए एक धार्मिक और सांस्कृतिक उपलब्धि बताया।








