बिहार की हार ने बढ़ाई आपसी ऱार !
बिहार विधानसभा चुनाव की हार ने कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट दिख रही है। कांग्रेस के कई नेता अपनी ही पार्टी के राज्य अध्यक्ष के खिलाफ धरना दे रहे हैं, वहीं राज्य में मुख्यमंत्री के बदलने की भी बात उठने लगी है। उत्तरप्रदेश के साथी के नेता भी गठबंधन को लेकर पार्टी को नसीहत दे रहे हैं। मतलब एक हार ने संकटों का अंबार खड़ा कर दिया है और नाटक काअध्याय शुरू हुआ “बिहार टू कर्नाटक
कर्नाटक में पुराना भूत फिर खड़ा हुआ है। कर्नाटक में चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री के लिए रस्साकस्सी शुरू हुआ वही परिस्थिति आज भी दिख रहा है। कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं के अनुसार तब सिद्धारमैया और डी के शिवकुमार के बीच के कलह को शांत करने के लिए 50:50 का फॉर्मूला तैयार कर दोनों के बीच टाइअप करा दिया गया था।
इसी बीच कुछ दिन पहले सिद्धारमैया के बेटे ने एक अलग ही पासा फेंक दिया। यतींद्र ने सतीश जारकिहोली का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए उछाल कर कर्नाटक कांग्रेस में एक अलग ही भूचाल ला दिया था। यतींद्र ने यह भी बताने की कोशिश कि उसके पिता की जगह अब एक नए विचारों वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री के तौर पर कर्नाटक को मिलना चाहिए। खैर अभी डी के शिवकुमार दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और उकने हाइ कमान गुजरात में रोड शो कर रहे हैं।
वहीं बिहार में एक अलग ही बखेड़ा शुरूहो चुका है। कांग्रेस के बिहार प्रभारी अल्लावरू और अध्यक्ष राजेश राम के खिलाफ सदाकत आश्रम में कांग्रेस के नेता धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका सीधा कहना है है कि टिकट बेचा गया और जो चुनाव जीत सकते थे, उन्हें पार्टी ने साइडलाइन कर दिया। सदाकत आश्रम में कांग्रेसियों द्वारा “टिकट चोर गद्दी छोर” के नारे लगाए जा रहे थे। कांग्रेस के कई नेता तो पप्पू यादव है कौन जो सदाकत आश्रम में आ गए। वो सब पप्पू यादव की दखलंदाजी से नाराज बताए जा रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस महिला कमेटी के कांग्रेस अध्यक्ष सरबत जहां ने भी इस्तीफा दे दिया है।
खैर अब आने वाले समय में ही पता चल पाएगा कि “कर्नाटक का नाटक” का अंत कैसा होगा। साथ ही बिहार का ठिकड़ा किसके ऊपर फूटेगा और उधर उत्तरप्रदेश में सहयोगियों के साथ ऊंट किस करवट बैठेगा।








