साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी; UGC सेमिनार में सोना देवी विश्वविद्यालय की भागीदारी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Advertisements
ad
Advertisements

डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी निवेश और ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए सतर्कता, डिजिटल साक्षरता और शिकायत पर जोर

उमेश कांत गिरी, ब्यूरो प्रमुख. घाटशिला. झारखंड

घाटशिला/खबर जिन्दगी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह अक्टूबर 2026 के तहत ‘चेतना श्रृंखला व्याख्यान’ का आयोजन किया गया। इसमें सोना देवी विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने सहभागिता की और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार तथा जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता के महत्व पर जोर दिया।

साइबर सुरक्षा पर केंद्रित रहा व्याख्यान

Advertisements
Advertisements
Advertisements

‘Cybercrime Uncovered: Threats, Prevention & Response’ (खतरे, बचाव एवं समाधान) विषय पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान का उद्देश्य साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, संभावित जोखिमों और बचाव के उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के निदेशक निशांत कुमार वक्ता के रूप में निर्धारित थे।

डिजिटल युग में सतर्कता जरूरी : डॉ. नीत नयना

सोना देवी विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और सोशल मीडिया ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है। हालांकि, इनके बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के खतरे भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध संदेशों पर भरोसा करने और निजी या वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार से भी जुड़ी है। जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों और आम नागरिकों को संभावित ऑनलाइन खतरों की पहचान करने तथा उनसे बचाव के लिए तैयार करने में मददगार हैं।

डिजिटल साक्षरता विकसित करने पर जोर: कुलपति, सोना देवी विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने कहा कि आधुनिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान देने के साथ तकनीकी चुनौतियों के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाना भी है। डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग, सूचनाओं की सत्यता की पहचान और विवेकपूर्ण निर्णय लेना आज के समय में महत्वपूर्ण कौशल हैं।

कुलपति ने ऑनलाइन प्रस्तावों की प्रामाणिकता जांचने और बिना सत्यापन के निजी जानकारी साझा नहीं करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने साइबर सुरक्षा को व्यक्ति, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी बताया।

फर्जी निवेश और ऑनलाइन धोखाधड़ी को पहचाने

व्याख्यान में साइबर अपराधों के बदलते तरीकों और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। इनमें सोशल मीडिया के जरिए निवेश संबंधी धोखाधड़ी, फर्जी ऑनलाइन बुकिंग, ई-कॉमर्स घोटाले, डीपफेक तकनीक से पहचान एवं छवि का दुरुपयोग और संदिग्ध एंड्रॉयड एप्लिकेशन (APK) के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी जैसे विषय शामिल रहे।

साइबर अपराध की शिकायत के लिए आधिकारिक माध्यम

कार्यक्रम में साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने और सहायता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध आधिकारिक माध्यमों की जानकारी भी साझा की गई। इनमें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और जागरूकता अभियान ‘साइबर दोस्त’ शामिल रहे।
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में पीड़ितों को जल्द से जल्द आधिकारिक माध्यम से शिकायत करने की सलाह दी गई। समय पर कार्रवाई करने से मामले की रिपोर्टिंग और उपलब्ध सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है।

सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण पर जोर

सोना देवी विश्वविद्यालय ने साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया। विश्वविद्यालय के अनुसार, विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक के अवसरों के साथ उससे जुड़े जोखिमों और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों की जानकारी देना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

UGC की ‘चेतना श्रृंखला व्याख्यान’ जैसी पहलें साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार को प्रोत्साहित करने में सहायक हैं। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए तकनीकी जानकारी के साथ सतर्कता, विवेकपूर्ण निर्णय और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान जरूरी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Advertisements