खबर कोडरमा के एक छोटे से रेलवे स्टेशन की है। जहां एक यात्री का गहनों से भरा बैग स्टेशन पर छूट जाता है। यह बैग वहां पास बैठे लोगों को मिलता है। वो खुद के स्तर से पता करते हैं लेकिन इस बैग के मालिक का पता नहीं चलता। लेकिन कहते हैं न कि जब भाग्य अच्छा हो तो सब बेहतर होता है और यही होता हुआ भी दिखा। अर्थयुग में ईमानदारी की ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलता है।
कोननगर की रहने वाली बैंक अधिकारी रूपश्री को हावड़ा जाना था। वह कोडरमा में वंदे भारत ट्रेन का इंतजार कर रही थी। सुबह 5:30 बजे ट्रेन आई और वो ट्रेन में सवार हो कर चली गई। इसी बीच रस्ते में उन्हें ध्यान आता हैं कि एक बैग जिसमें गहने रखे थे वो स्टेशन पर ही रह गया। उन्होंने तुरंत आरपीएफ और जीआरपी को इसकी सूचना दी।
आरपीएफ और जीआरपी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए इसकी जांच पड़ताल शुरू किया। जांच के लिए उन्होंने स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया। सीसीटीवी फुटेज में 4 लोगों के समूह द्वारा बैग जाते हुए देखा गया। फुटेज को कोननगर के स्थानीय लोगों को दिखाया गया लेकिन किसी ने भी पहचान नहीं की। इसी बीच एक अन्य जगह लिलुआ के रहने वाले रहवासी को यह फुटेज मिला जिसने पुलिस को एक फोन नंबर दिया। फोन पर जब संपर्क किया गया तो वो नंबर एक दिहाड़ी मजदूर का मिला।
दिहाड़ी मजदूर से संपर्क करने पर पता चला कि वो बैग सुरक्षित रखा हुआ है। मजदूरों ने कहा कि वो खुद से बैग के मालिक को खोज रहे थे लेकिन पता नहीं पाया। मजदूरों न कहा कि की वो लिलुआ में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। और वो सब सिवान के रहने वाले हैं। वो पुलिस के पास भी गए थे। लेकिन क्यूंकि पुलिस के पास भी बैग के गुमशुदा होने की कोई जानकारी नहीं थी इसलिए वो बैग वापस खुद के पास रख लिए थे।
मजदूरों ने वह बैग जीआरपी को सौंप दिया। फिर जीआरपी ने वह बैग सही सलामत रूपश्री को वापस कर दिया गया। बैग वापस मिलने पर रूपश्री ने मजदूरों का आभार व्यक्त किया। पुलिस ने भी मजदूरों की सराहना करते हुए कहा कि इन मजदूरों ने अर्थयुग में ईमानदारी की मिशाल पेश की है। इन मजदूरों में से एक मजदूर मोहम्मद इस्माइल ने कहा कि हम मेहनत से पैसा कमाते है। गरीब हैं लेकिन सुखी हैं और मेहनत की कमाई खाते हैं। पुलिस ने सारे मजदूरों को शाबाशी देते हुए आर्थिक पुरस्कार भी दिया।








