राजस्थान के विकास और बिजली की किल्लत को खत्म करने के लिए बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में सोलर कंपनिया नई परियोजना लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर काटे जा रहे हैं। जिसको बचाने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अब “खेजड़ी बचाव आंदोलन” के साथ खड़ी दिख रही हैं।
रेगिस्तान के देव खेजड़ी के कई नाम हैं। बिहार में इसे शमी के नाम से जाना जाता है। शमी वही पौधा है, जिसकी हर पूजा में जरूरत पड़ती है। शमी का पेड़ रेगिस्तान की तपती और चिलचिलाती धूप को भी सहन कर लेता है और सालों भर हरा भरा रहता है।
दरअसल राजस्थान की गर्मी को देखते हुए सोलर कंपनियों ने सरकार से पश्चिमी राजस्थान और बीकानेर के इलाकों में सोलर प्लेट लगाने की इजाजत मांगी थी। सोलर प्लेट लगाने के क्रम में इनलोगों ने खेजड़ी के पेड़ को काटना शुरू कर दिया जिसपर स्थानीय लोगों ने इस पेड़ कटाई को रोकने का प्रयास किया जो अब एक जनांदोलन का रूप अख्तियार कर लिया है।
इसकी जानकारी जब वसुंधरा राजे को लगी तो वो भी इस खेजड़ी बचाव मुहिम में शामिल हो सोमवार को देववृक्ष खेजड़ी की पूजा की। उनका कहना था कि भीषण गर्मियों में जब सारे पेड़ पौधे सुख जाते है, तो यही पौधा रेगिस्तान में रहने वाले लोगों और जानवरों के लिए छाया के रूप में सहारा बनता है। इन्होंने राजस्थान के एक लोकोक्ति का भी जिक्र किया जिसका मतलब है भले सिर कट जाए लेकिन पेड़ पर आंच नहीं आनी चाहिए।
मंगलवार को इस आंदोलन में भाग लेने के लिए राजस्थान के अलावा 4 अन्य राज्यों उत्तरप्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से लाखों लोग बीकानेर के महापड़ाव में उपस्थित हो गए। जिसमें ज्यादातर महिलाएं थी। इसके पहले यहां पर 400 के आसपास संतों और लोगों ने धरना देना शुरू कर दिया था। मंगलवार को सरकार की तरफ से मुद्दा सुलझाने के लिए कलेक्टर नम्रता वृष्णी को आंदोलनकारियों से बात करने को भेजा गया था, लेकिन वार्ता विफल रही।










