
दीपावली भी बीता और बिहार का महापर्व छठ भी सर पर है, पर शिक्षकों की जेब खाली…आखिर शिक्षकों की कब खत्म होगी तंगहाली। तंगी में ही शिक्षक महापर्व तक मनाने को मजबूर हैं आखिर किसकी गलती है सरकार, विभाग या खुद शिक्षाकर्मी। जाहिर सी बात है सरकार और शिक्षाकर्मी विभाग को ही दोष देंगे, क्यूंकि विभाग समय से जागती ही नहीं कर्मचारी कानों में तेल डाल सोए रहते हैं।
शिक्षकों की त्राहिमाम आवाज आखिरकार शनिवार को कभी शिक्षक संघ के अध्यक्ष रहे मुजफ्फरपुर के विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी तक पहुंची और उन्होंने तत्काल जानकारी लेते हुए बिहार के जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर पूछा है कि शिक्षकों का वेतन अब तक क्यों नहीं मिला।
इस संबंध में जिला पदाधिकारी सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली और मुजफ्फरपुर को पत्र लिखकर उन्होंने दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई करने की मांग की है । जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने कहा है कि यह अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि दशहरा, दीपावली और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्यौहार में भी अधिकांश शिक्षकों को वेतन नहीं मिल पाया है। कई महीनो से इनका वेतन बंद है। राज्य में बड़े पैमाने पर सक्षमता परीक्षा आधारित शिक्षक विशिष्ट शिक्षक के पदों पर योगदान देकर कार्यरत हैं। अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान शिक्षक के रूप में बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की पोस्टिंग की गई है। वहीं उच्च विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में विद्यालय अध्यापक स्थानांतरित होकर नये पदस्थापना वाले विद्यालयों में कार्य कर रहे हैं लेकिन इन शिक्षकों के वेतन भुगतान के मामले में पूरे जिले में त्राहिमाम की स्थिति मची हुई है।
प्रधान शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों का अब तक कन्वर्जन नहीं किया जा सका है। कुछ लोगों का कन्वर्जन हो गया है इसके बावजूद उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है। अन्य जिलों से जो शिक्षक स्थानांतरित होकर आए हैं उन्हें उन जिलों से Out होने के बाद भी यहां पर In नहीं किया जा रहा है। विशिष्ट शिक्षकों के फिक्सेशन का कार्य पूर्ण करने का विभागीय आदेश होने के बावजूद प्रखंड स्तर से कहीं फिक्सेशन नहीं किया गया है तो कहीं फिक्सेशन के पश्चात जिला स्तर पर इनका वेतन विपत्र भेजा जा रहा है तो उसका भुगतान नहीं हो रहा है।
बड़ी संख्या में शिक्षकों के द्वारा यह शिकायत की जा रही है की पिक एंड चूज के आधार पर पैसा लेकर काम किया जा रहा है । सभी शिक्षा कार्यालयों में शिक्षकों का जमघट बना हुआ है। आपाधापी की स्थिति मची हुई है। वेतन नहीं मिलने के कारण इन शिक्षकों की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि छठ दीपावली जैसे त्यौहार में अपने बच्चों को कपड़े तक खरीदने की स्थिति में नहीं है। शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं। इसके बावजूद उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर उगाही का खेल चल रहा है और कोई सुनने वाला नहीं है ।








