
दलों के घोषणापत्र में लोक लुभावन योजनाएं…धरातल पर किसकी सरकार बनाएं..!!
पटना के होटल मौर्या में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, HAM नेता जीतनराम मांझी, लोजपा (R) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान और RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने NDA का घोषणापत्र जारी किया। वहीं महागठबंधन ने 28 तारीख को अपना साझा घोषणापत्र ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ के नाम से जारी किया था। जिसमें हर घर नौकरी, महिलाओं को 2500 महीना, संविदाकर्मियों का स्थायीकरण और आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल करने जैसे वादे किए गए हैं। इन दोनों के घोषणापत्रों को बारीकी से समझना जरूरी है।
मां जानकी के मंदिर को 5 साल में विकसित करने की बात NDA ने घोषणापत्र में कही है और इस इलाके को सीतापुरम नाम देने की बात कही है। पर्यटन के क्षेत्र में बिहार के लिए एक लंबी छलांग साबित हो सकती है। पर्यटन का जिक्र महागठबंधन ने जरूर अपने मेनिफेस्टो में किया है, लेकिन कोई क्षेत्र निर्धारित नहीं है।
NDA ने जहां किसानों को 9000 रुपए हर साल किसान सम्मान निधि के रूप में देने का वादा कर रही है जिसमें से 6000 रुपए केंद्र सरकार की तरफ से दी जा रही है और 3000 रुपए बिहार सरकार की तरफ से चुनाव बाद अगर NDA की सरकार बनती है तो दी जाएगी। NDA ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर में 1 लाख करोड़ का निवेश, धान गेहूं मक्का दलहन जैसी फसलों को पंचायती स्तर पर खरीद की व्यवस्था की जाएगी, जो बिहार में कई साल पहले ही बंद कर दी गई थी। वहीं महागठबंधन की तरफ से भूमिहीनों को 5 डिस्मिल जमीन का टुकड़ा दिया जाएगा। और महिला किसानों को प्रतिमाह 2000 रुपए देने की बात जरूर तेजस्वी प्रण में की गई है।
अब बिजली की बात भी कर लेते हैं जिसपर सरकार में रहते किसी सब्सिडी या फ्री Unit की बात तक नहीं की गई पर मेनिफेस्टो में जरूर जगह दिया गया है। नीतीश कुमार ने जहां बिहार में चुनाव के ऐन पहले 125 फ्री यूनिट बिजली की उपलब्धता की गई, वही महागठबंधन ने अपने घोषणापत्र में 200 फ्री यूनिट देने की बात कही गई है। वैसे फ्री यू ओर वाले पंजाब हिमाचल जैसे कई राज्यों में ये व्यवस्था लागू है, लेकिन बिजली की कटौती से लोग बेहद परेशान हैं।
NDA के घोषणापत्र में बिहार के हर जिले में न्यूनतम 1 फैक्ट्री 5 साल में 1 करोड़ रोजगार की बात की है है वही महागठबंधन के घोषणापत्र में हर घर में एक सरकारी नौकरी की बात की जा रही है। जिसमें कहा गया है कि सरकार बनने के 20 दिनो के अंदर प्रदेश के हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का अधिनियम लाया जाएगा। और 20 महीने में शीघ्र नौकरी प्रदान करने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर देगी। मतलब 20 महीने 20 दिन में नौकरी देने की प्रक्रिया ही प्रारंभ होगी। इसके बाद विभागों से रिक्त पदों की जानकारी लेकर रिक्तियां जारी कर फॉर्म भरवाया जाएगा। फिर विभागीय कार्यवाही होगी। उसके बाद परीक्षा लिया जाएगा। परीक्षाओं के कई स्तर के बाद फाइनल परिणाम निकलेगा। फाइनली इन सब में कितन समय लगेगा। इसका कोई जिक्र नहीं है।
पटना के पास नया ग्रीनफील्ड शहर और एयरपोर्ट, दरभंगा और पूर्णिया से इंटरनेशनल विमान सेवा, 7 नया एक्सप्रेस वे 3600 km railway ट्रैक का आधुनिकरण अमृत भारत एक्सप्रेस नमो रैपिड ट्रेन तथा 4शहरों में मेट्रो की सुविधा देने की बात NDA की घोषणापत्र में शामिल हैं, वही महागठबंधन की तरफ से 5 नए एक्सप्रेस की बात कही है।
महिला वोटर्स को साधने के लिए तेजस्वी चुनाव की घोषणा के पहले से ही “माई बहिन योजना” के तहत हर महीन 2500 देने की बात कर रहे हैं लेकिन नीतीश सरकार ने चुनाव की घोषणा से पहले ही “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना” लागू करते हुए महिला लाभार्थियों के खाते में 10 हजार रुपए की पहली आर्थिक मदद भेज दी। तेजस्वी यादव ने कामगारों को भी साझा घोषणा पत्र में किए गए वादों के ज़रिए आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। जबकि NDA ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को 2 लाख तक की मदद और 1 करोड़ महिलाओं को लखपतिया दीदी बनाने का लक्ष्य है।
अतिपिछड़ा वर्ग के व्यवसाई समूह को 10लाख की सहायता राशि देने की बात NDA घोषणापत्र में कही गई है वही महागठबंधन ने भी अपने मेनिफेस्टो में मोस्ट बैकवर्ड क्लास एट्रोसिटी प्रिवेंशन एक्ट बनाने की बात कही गई है। साथ शहरी निकायों में आरक्षण 20%से बढ़ाकर 30% करने की बात कही गई है।
NDA के मेनिफेस्टो में जहां गरीबों के बच्चों को KG से PG की मुफ्त शिक्षा की बात कही गई है वही महागठबंधन ने परीक्षा शुल्क समाप्त करना, परीक्षा केंद्र तक मुफ़्त यात्रा सुविधा देने का वादा कर रही है। साथ ही शिक्षा का विस्तार करने के लिए प्रत्येक अनुमंडल में महिला कॉलेज और जिन 136 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहाँ डिग्री कॉलेज खोले जाने की बात कही है।
जीविका दीदियों को बढ़ाने का श्रेय नीतीश कुमार को ही जाता है। 2006 में बिहार सरकार ने ये प्रोग्राम शुरू किया था और अब तो जीविका दीदियों की संख्या लाखों में है। अभी चुनावों से ठीक पहले नीतीश सरकार ने इनका मानदेय दोगुना कर दिया था। सो अब महागठबंधन भी महिलाओं तक अपनी पहुंच बनाने को सभी जीविका दीदियों को स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की बात अपने घोषणापत्र में की है। और उनका वेतन 30,000 रुपए प्रतिमाह निर्धारित करने की बात कही गई है।
महागठबंधन ने अपने घोषणापत्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की बात कही है। तथा शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए गृह जिला के 70 किलोमीटर के दायरे में स्थानांतरण नीति बनाई जाएगी, और वित्त रहित महाविद्यालयों को वित्त सहित मान्यता देकर समान वेतन-भत्ता दिया जाएगा।
वैसे बिहार की खुद की आमदनी इतनी ही है कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देने के लिए भी बिहार सरकार को केंद्र की तरफ से राजस्व में हिस्सेदारी का इंतजार करना पड़ता है। इस स्थिति में बिहार की आमदनी बढ़ाने पर किसी ने भी अपने घोषणापत्र में कोई बात नहीं की है।








