काफी हो हंगामे के बाद केंद्र सरकार ने अप्रैल में जातिगत जनगणना का फैसला लिया था। तब भी कई विपक्षी पार्टियां बिहार की जातिगत जनगणना को केंद्र में रख इसका श्रेय लेने में लग गई थी। और आज कैबिनेट की मीटिंग के बाद केंद्र सरकार ने इसके बजट के रूप में 11718 करोड़ की मंजूरी दे दी।
3 साल पहले बिहार सरकार द्वारा जातिगत जनगणना के निर्णय ने पूरे देश में हलचल मचा दिया था। तब बिहार में सरकार नीतीश कुमार की ही थी लेकिन सहयोगी बदला हुआ था। बिहार पर उस समय जेडीयू राजद के साथ शासन कर रहा था। उसी दरम्यान बीजेपी की काट के तौर पर जातिगत जनगणना कराई गई थी। जिसे 1 साल में बिहार सरकार ने पूरा करा अक्टूबर 2023 में इसका आंकड़ा भी जारी कर दिया गया था। इस आंकड़े की झलक 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के समय दिखी। जब नेता अपने आबादी के प्रतिशत की बात कह टिकट में हिस्सेदारी की बात कह रहे थे।
खैर अब बिहार चुनाव बीती बात हो गई। लेकिन बिहार कि जातिगत जनगणना ने केंद्र को सचेत जरूर कर दिया था। इसी बात को लेकर भारत सरकार 2027 में जातिगत जनगणना कराने जा रही है। जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई है और कैबिनेट ने जातीय जनगणना के लिए 11718 करोड़ का बजट भी आवंटित का दिया है।
यह “जनगणना 2027” पूरी तरह से डिजिटलाइज होगी। जिसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में अप्रैल 2026 से सितम्बर 2026 तक घरों की गिनती कर सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद 2027 में फरवरी से जनगणना शुरू होगी और जातीय जनगणना भी इसका होगा। प्रवासी लोगों की गणना प्रवास की अवधि के हिसाब से की जायेगी और मूल स्थान से प्रवास के समय को अंकित किया जाएगा।










