
मुजफ्फरपुर के डॉक्टरों की मंडी जूरन छपरा वैसे तो मुजफ्फरपुर से लेकर सीतामढ़ी तक के लिए जीवन की आशा है, लेकिन घुटन भी यहीं होता है। इस जूरन छपरा में कम से कम 1500 से 2000 तक डॉक्टरों ने 1 या 2 रूम के जगह में अपनी क्लीनिक खोल रखी है। कई सारे निजी अस्पताल भी हैं लेकिन पार्किंग की व्यवस्था इक्के-दुक्के अस्पतालों में ही देखने को मिलती है।आएदिन के जाम से लोगों को जिन परेशानियों से गुजरना पड़ता है, बयान नहीं किया जा सकता।
एक तो पार्किंग की व्यवस्था तक नहीं है। लोग सड़को पर बाइक, कार तक लगाकर डॉक्टर से मिलने या और दवाइयों के लिए चले जाते हैं। अगर एक 4 पहिया वाहन सड़क पर खड़ी हो जाए तो बस वहीं से जाम लगना शुरू हो जाता है। और उसके बाद लोगों की तूतू-मैमे से सड़क पर चलने वाले लोग परेशान होते हैं।

अभी तो हम जूरन छपरा के रोड नंबर एक और दो की बात कर रहे हैं, तीन और चार नंबर की भी सड़कें हैं, इसके अलावा भी कई गलियां है उसपर आगे बात करेंगे। 1 नंबर में भी 3-4 निजी अस्पताल हैं जहां लोग की भीड़ ज्यादा रहती है। अगर कोई बहुत ही ज्यादा गंभीर हालत में होता है तो इन्हीं अस्पतालों की तरफ रुख करता है। ऐसे में एम्बुलेंस भी कई कई मिनटों तक इस जाम में फंसे रह जाते हैं। अब आप समझिए कि उस परिवार के ऊपर क्या बित्तती होगी। जब वो ऐसे जाम में फंस जाते हैं और मरीज की जान चली जाती है।

सड़क पर ही दुकान भी लगाते हैं ठेलावाले
सड़को पर फल मिठाई के ठेले भी दिख जाते हैं वह भी जाम लगाने में पूरीतरह सहायक हैं। अगर किसी ने कह दिया कि जाम लगा है थोड़ा आगे पीछे कर लो, तो।ये मना करने के साथ मारपीट पर भी उत्तर हो जाते हैं।
पूरे भारत में लगभग 3000 दवाईयों की कंपनी हैं और ये पूरे भारत में अपने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के द्वारा दवाइयों की मार्केटिंग के साथ व्यवसाय करते हैं। ये भी जब डॉक्टर्स के पास विजिट के लिए जाते हैं तो इनके भी बाइक और कार सड़क पर ही किनारे में होता है। इसके कारण भी पैदल जाने वालों को बेहद ही परेशानी होती है










