हर जन मानस के अंदर एक सवाल अवश्य पैदा होता है कि हमारा जन्म किस उद्देश्य के लिए हुआ है। हमारे जीवन की भौतिक अवस्था क्या होगी। सफलता किस दिशा या कर्म से उद्देश्यों की प्राप्ति होगी। इन सारे सवालों के समाधान हमारी जन्मकुंडली में संदर्भित हैं या यूं कहिए कि कुंडली व्यक्ति के जीवन का आईना है।
इसी संदर्भ में आज हम बात करेंगे कि कुंडली में किस ग्रह के उच्च होने से राजनेता बनने का योग बनते हैं।
1. जन्म कुंडली के प्रथम भाव में जब सूरज या मंगल या बृहस्पति बलवान होता है तब सामाजिक स्तर पर प्रतिष्ठित पद प्राप्त करते हैं। इसका आशय है कि जब तीन ग्रह उच्च के होते हैं तब राजनीति के तरफ मन का खिंचाव होता है ।
2. जब कुंडली के केंद्र में चार ग्रह उच्च के होते हैं जैसे राहु दसवें भाव में शनि की युक्ति या त्रिकोण में शनि की युक्ति मजबूत होती है तब आप समाज के लिए एक अगुआ बनकर काम करते हैं ।
3. शनि जब मूल त्रिकोण की राशि बनती है और कुंडली में शनि दसवें घर में विराजमान होता है तब आप एक सफल सामाजिक कार्यकर्ता बनते हैं।
4. कुंडली के छठा घर, सातवां घर, दसवां और ग्यारहवां घर पर राहु की अपनी दृष्टि हो तब आप बहुत चतुर राजनेता बनेंगे और अपने पद पर लंबे समय तक आसीन रहेंगे आपका जन समर्थन बहुत लंबा समय तक साथ देगा।
5. अब हम बात करते हैं सूरज और मंगल के द्वारा बनने वाले राजनेता का योग। जब सूर्य लग्न में हो और अपने ही राशि पर हो और मंगल की शुभ दृष्टि पड़ रही हो तब आप एक उच्च कोटि के विद्वान राजनेता बनते हैं और सरकार में मंत्री पद तक प्राप्त करते हैं ।
6. लगन कुंडली में राहु, शनि के साथ शुभ दृष्टि बनाता है तभी राजनेता का योग बनता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल-सूर्य-शनि-राहु अगर शुभ और बलवान है तब आप ये समझिए कि खुद ईश्वर ने जनमानस की सेवा के काम के लिए इस धरती पर आपको जीवन दिया है।
इस सब का निष्कर्ष यही है कि किसी अच्छे ज्योतिषी को अपने जन्म कुंडली दिखाकर अपने करियर और भविष्य का चुनाव करें।








