
07/11/2025 को जानकी बल्लभ शास्त्री जी के आवास निराला निकेतन में महावाणी स्मरण काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता हिन्दी एवं बज्जिका के वरिष्ठ कथाकार व कवि देवेन्द्र कुमार ने किया एवं मंच संचालन डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने किया। इसमें शहर के वरिष्ठ एवं नवोदित साहित्यकार और कवियों ने काव्य पाठ किया।
श्री राजीवेन्द्र किशोर ने -मैं गाऊं तेरा मंत्र समझ,शास्त्री जी की रचना पढ़कर गोष्ठी की शुरुआत की। हिंदी एवं भोजपुरी के वरिष्ठ गीतकार सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने –अधपरतिया घरवा आवेला हमार पियवा निसखार सुनाकर माहौल को सुंदर बना दिया। देवेन्द्र कुमार ने –नदी हूँ मैं, मैं मरूं जी सुखकर, सुखकर तू भी मरेगा,सुनाया।वरिष्ठ कवि एंव पत्रकार प्रमोद नारायण मिश्र ने –आज कहने दो वरना कह न पायेंगे सुनाया। डा. बीरेन्द्र कुमार मल्लिक ने –भद्र काली कपालिनी सुनाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
शशि रंजन वर्मा ने –नारी व्यथा आऊं -आऊं हे सखी सुनाया। डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने सावन के बुन्नी बसई हऽ सुनाकर भाव विभोर कर दिया। रामवृक्ष राम चकपुरी ने –अंधकार मिटा, की है रौशनी सुनाया। उमेश राज ने –जितने अपने थे सब पराये हो गये सुनाया। वरिष्ठ साहित्यकार एंव गीतकार अंजनी कुमार पाठक ने –जबतक जीवन,नेकी है करना सुनाया। समाज सेवी मोहन प्रसाद सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रकट किया।








