6 महीने पहले से शिक्षकों का स्थानांतरण प्रक्रिया प्रारंभ हुआ। तब भी नीतीश की सरकार थी, चुनाव हो गए अब भी नीतीश की सरकार है फिर भी शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है। मंत्री से लेकर अधिकारी तक कह रहे हैं, काम हो रहा है लेकिन काम अब तक नहीं दिख रहा क्योंकि शिक्षकों को वेतन मिला नहीं। वेतन और स्थानांतरण की समस्या को लेकर शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी सदन के बाहर प्रदर्शन पर बैठे। तथा हाथों में तख्ती लिए पर्षद ने कारवाई की मांग की।
श्री बृजवासी ने कहा कि जुलाई में शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया और उनमें अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिनका वेतन भुगतान नहीं किया गया है। यह शिक्षक लगातार अलग-अलग जिलों में दौड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिक्ति नहीं रहने के कारण इनका वेतन नहीं मिल पा रहा है ।श्री बृजवासी ने सवाल उठाया कि जब रिक्ति ही नहीं थी तो फिर स्थानांतरण कैसे कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया है कि इन सब में पैसे का खेल चल रहा है। मनमाने तरीके से स्थानांतरण किया जा रहा है। शिक्षकों का स्थानांतरण ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का स्थानांतरण भी मलाई खाने के लिए किया जा रहा है। विधान परिषद ने आरोप लगाया कि जब पटना में ट्रांसफर पोस्टिंग पर रोक लगी हुई है तो फिर यह प्रशासनिक स्थांतरण कैसे होता है। उन्होंने इन सब पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि अगर इस पर कार्रवाई नहीं होती है तो मैं आगे तक इसे ले जाऊंगा।
वैसे खुद MLC से सवाल किया गया कि आपने शिक्षकों की आवाज या समस्याओं को सदन में उठाने की कोशिश की तो वो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए उनका कहना था कि “राज्यपाल के अभिभाषण पर हम बोलना चाह रहे थे और आज सदन का अंतिम दिन है तो हम कहां जाएं बोलने।” ब्रजवासी जी कम से कम ये तो बताने की कोशिश करते की उन्होंने सदन में अपने चिंताओं पर कोई सवाल प्रश्नकाल या शून्यकाल के लिए सदन के सामने दिया था या नहीं।








