मणिरत्नम की फिल्म “रोजा” से प्रसिद्ध हुए संगीतकार ए आर रहमान (अल्लाह रक्खा रहमान) फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर बयान दे फंस गए।अभी कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में रहमान ने एक बयान दिया था कि “पिछले 8 सालों से उन्हें कोई काम नहीं मिल रहा है और इसकी वजह सांप्रदायिक कारण हो सकते हैं।”
इस बयान पर जब उनकी आलोचना शुरू हुई तो लगे सफाई देने। उन्होंने सफाई में कहा कि भारत उनका घर है और यहीं से उन्हें प्रेरणा मिलती है। वीडियो में उन्होंने कहा है कि “किसी कल्चर से जुड़ने, उसका जश्न मनाने और सम्मान करने का जरिया संगीत रहा है। भारत मेरी प्रेरणा है, मेरा शिक्षक, मेरा घर है। मेरा इरादा किसी को चोट पहुंचाना नहीं था और आशा करता हूं कि मेरी सच्चाई महसूस की जाएगी।”
ए आर रहमान के बयान पर पत्रकार दीपक चौरसिया के अनुसार “फिल्म रामायण के लिए संगीत दे रहे ऑस्कर विनिंग AR Rahman को फिल्म और म्यूज़िक इंडस्ट्री में सांप्रदायिकता नज़र आती है। उन्हें छावा भी एक विभाजनकारी फिल्म लगती है, जबकि उस फिल्म का संगीत भी खुद उन्होंने ही दिया है। इस्लाम में कन्वर्ट हुए ए आर रहमान ये बात भूल जाते हैं कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने दिलीप कुमार से लेकर तीनों खानों को गले लगाया। अब सवाल ये खड़ा होता है कि इतना सम्मान, नाम और काम पाने वाले रहमान फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर अब किस एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं? बावजूद इन सबके रहमान को लगता है सत्ता परिवर्तन के कारण उन्हें पिछले 8 सालों में काम मिलना कम हो गया है।”
जाहिर सी बात है कि सोशल मीडिया का जमाना है मुंह से बात निकली नहीं की वायरल होने में समय नहीं लगता। ए आर रहमान की बातों पर लोग अपनी अपनी तरह से प्रतिक्रिया देने लगे। एक अन्य बयानवीर ध्रुव राठी ने कहा कि “उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और वे बहुसांस्कृतिक संगीत के समर्थक हैं। उन्हें आलोचकों से देशभक्ति का प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है।”









