
मुजफ्फरपुर के औराई स्थित डिहजीवर हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर की तस्वीरों ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मुजफ्फरपुर/औराई। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए सरकारी हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों की जमीनी हकीकत कई बार सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर देती है। मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड स्थित डिहजीवर पंचायत से सामने आई तस्वीर भी कुछ ऐसा ही सवाल पूछ रही है।

तस्वीर डिहजीवर पंचायत स्थित एक हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर की है। इसी परिसर में छह बेड का शाहीजीवर अस्पताल भी समाहित है। जानकारी के अनुसार शाहीजीवर अस्पताल का पुराना भवन गिर चुका है और उसके बाद अस्पताल की व्यवस्था इसी केंद्र में समाहित कर दी गई।
अस्पताल बना पशुओं का तबेला
जिस सरकारी भवन का उद्देश्य ग्रामीणों को इलाज के लिए उपलब्ध कराना है, वहां नियमित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध ही नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र का परिसर ऐसा दिखाई देता है, जहां मरीजों की आवाजाही के बजाय भैंसों का ठिकाना नजर आ रहा है। स्वास्थ्य सुविधा के लिए बनाए गए भवन का इस तरह इस्तेमाल होना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है।
कभी-कभार आते हैं स्वास्थ्य कर्मी

स्थानीय लोगों के अनुसार केंद्र पर तैनात एएनएम और अन्य कर्मियों की मौजूदगी नियमित नहीं रहती। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी कभी-कभार आते हैं और औपचारिकता पूरी करने के बाद चले जाते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित कर्मियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन कोई स्वास्थ्यकर्मी मौके पर उपलब्ध नहीं था।
छह बेड का अस्पताल, लेकिन मरीज नदारद
छह बेड के अस्पताल की व्यवस्था के पीछे ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन यदि केंद्र पर नियमित कर्मचारी उपलब्ध न हो और न मरीजों के इलाज की व्यवस्था, तो सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
चाहरदिवारी निर्माण पर भी उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने केंद्र की चाहरदिवारी के निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य महज औपचारिकता बनकर रह गई और सरकारी राशि का इस्तेमाल भैसों और पशुओं का तबेला बनकर रह गया है। यहां सरकारी धन खर्च हुआ है, तो निर्माण कार्य की लागत और उसकी गुणवत्ता की जांच का कोई ब्यौरा उपलब्ध नहीं है।
सरकार से जवाब मांगती तस्वीर
स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाना तभी सार्थक है जब वहां डॉक्टर/स्वास्थ्यकर्मी, दवाएं, उपकरण और मरीजों के इलाज की नियमित व्यवस्था भी सुनिश्चित हो। डिहजीवर की तस्वीर सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सामने कई सवाल खड़े करती है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का असली मूल्यांकन भवनों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि जरूरत के वक्त ग्रामीण को इलाज मिलता है या नहीं।
डिहजीवर की तस्वीर यदि मौजूदा स्थिति को सही तरीके से दर्शाती है, तो यह केवल एक भवन की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही की गंभीर परीक्षा है।










