सोमवार से संसद का शीतकालिन सत्र की शुरुआत हो गई है। साथ ही आज से बिहार विधानसभा के सत्र का भी आगाज हो चुका है। दोनों जगह सत्र हंगामेदार होने की पूरी संभावना है। बिहार में अभी अभी विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री की शपथ भी ले चुके हैं। नई सरकार का पहला सत्र सोमवार से शुरुआत हुआ है जहां चुनाव जीतकर आए विधायकों को शपथ दिलाई जा रही है।
जिस तरह से SIR का मुद्दा पिछले कई महीनों से पूरे देश में छाया हुआ है। बिहार में सफलता पूर्वक SIR करा चुनाव आयोग देश के अन्य 12 राज्यों में इसको संचालित करा रही है। BLO पर भारी दबाव और मार्मिक घटनाओं ने विपक्ष को विरोध का एक पुरजोर हथियार दे दिया है।
वैसे संसद सत्र शुरू होने के पहले प्रधानमंत्री ने बिहार चुनाव का जिक्र किया। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि “कई दल पराजय से परेशान हैं, उन्हें पराजय के निराशा से बाहर निकलने की बात कही। एक दो दल तो ऐसे है जो पराजय को पचा नहीं पा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि “मुझे तो लग रहा था कि इतने दिन हो गए, अब सुधर गए होंगे। लेकिन बयानबाज़ियों से ऐसा नहीं लग रहा। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया है कि शीतकालीन सत्र पराजय की बौखलाहट का मैदान नहीं बनाना चाहिए और यह शीतकालीन सत्र विजय के अहंकार में भी परिवर्तित नहीं होना चाहिए।
सरकार जहां इस सत्र में लगभग 14 विधेयकों को पेश करने की योजना बना रही है वहीं विपक्ष सरकार को SIR के मुद्दे पर घेरने की पुरजोर कोशिश करेगी। वैसे कहा जा सकता है कि सरकार को इस सत्र में रेड कार्पेट नहीं मिलनेवाली। आपको बता दें कि संसद का शीतकालिन सत्र 20 दिसंबर तक चलनेवाला है।









