
ये वाकया हुआ है पहरा गांव में जो मधुबनी के हरलाखी प्रखंड में आता है। पिता की डांट ने उसे इतनी नागवार लगी कि उसने घर ही छोड़ दिया। पप्पू अब लगभग 37 साल का हो चुका है उसका जन्म 1 जनवरी 1988 में हुआ था। पिता रामचंद्र ठाकुर ने लगभग 25 साल पहले पप्पू को डांटा था। इसी डांट पर उसने घर छोड़ दिया। उसकी खोज शुरू हुई तो 2 साल बाद वो दिल्ली में मिला जहा से उसे घर लाया गया।
2 साल बाद वो फिर से गायब हुआ तो काफी खोज बिन करने के बाद भी पता नहीं चला तो परिजन भी थक हार कर बैठ गए।लगभग 2 वर्ष पहले पप्पू ज्ञान विज्ञान समिति के रिकवरी शेल्टर के सदस्यों को गांधी मैदान के पास बीमार हालत में मिला। उस समय उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी जिसके कारण खुद के बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ था।
उसकी स्थिति को देखते हुए रिकवरी शेल्टर के इंचार्ज मुरलीधर और फील्ड कॉर्डिनेटर अशर्फी सदा ने उसे पीएमसीएच में भर्ती कराया। जहां उसका 2 सालों तक इलाज चलता रहा। उसकी मानसिक स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ तो उससे काउंसिलिंग कर पूछताछ की गई जिसमें उसने बताया कि उसका घर पहरा गांव में पड़ता है जो मधुबनी जिले में आता है। उसके पिता का नाम रामचंद्र ठाकुर है।
इसके बाद रिकवरी शेल्टर के सदस्यों ने पूरी जांच पड़ताल की जिसमें पप्पू के द्वारा बताई गई जानकारी सही पाई गई। फिर रिकवरी शेल्टर के सदस्यों ने उसे उसके पिता को सुपुर्द किया। 22 सालों के बाद अपने बेटे को देख रामचंद्र ठाकुर के आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। पूरे गांव में खुशी का माहौल देखा गया। पप्पू के घर लौटने से मां गंभीरा देवी बहन पुतुल देवी दादा दादी सहित पूरे गांव में खुशियां देखी गई।








