18 जनवरी को ही इस खबर को khabarjindagi.com ने बता दिया था कि 25 तारीख को राजद के कार्यकारिणी की बैठक में कुछ बड़ा हो सकता है, और बड़ा हो गया। लेकिन थोड़ा वक्त लगा दिया लालू यादव ने।
आज पटना के एक होटल में राजद के कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई थी। यह बैठक इसके लिए नहीं थी कि अगले हफ्ते से यानी 2 फरवरी से बिहार विधानसभा का सत्र आहूत होना है। बल्कि यह बैठक बुलाई गई थी राष्ट्रीय जनता दल को, लालू के लाल के हाथों में सौंपा जाना था।
इस बैठक में लालू के सिपहसालार भोला यादव ने तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कार्यकारिणी में प्रस्ताव रखा। अभी इस लाइन को ध्यान से पढ़िएगा कि इस प्रस्ताव को खुद लालू यादव के निर्देश पर कार्यकारिणी की बैठक में रखा गया था। लालू यादव खुद ही इस कार्य को करना चाह रहे थे। क्योंकि लालू यादव स्वास्थ्य कारणों से राजनीति में अब प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय नहीं हो पाते थे, इसलिए भोलायादव के प्रस्ताव को कार्यकारिणी के हाथ उठाकर अपना समर्थन दिया, और पार्टी की पुरी कमान राबड़ी देवी, मीसा भारती और संजय यादव के सामने तेजस्वी को सौंप दी गई।
वैसे लालू यादव को यह कार्य 5 साल पहले कर देना चाहिए था। लेकिन अब देर हो गई है। 75 से 25 पर लाकर छोड़ दिया इस अति आत्मविश्वास ने। कहा जाता है कि समय रहते अगली पीढ़ी को पूरा तख्तों ताज सौंप दिया जाना चाहिए, जिससे उसके ऊपर जिम्मेवारी का बोझ आ जाए और कोई भी निर्णय समझ बुझ का ले सके। अब लालू के राजद का तेजस्वीकरण हो चुका है, और इंतजार करिए तेजस्वी के इस नए राजद का कि अब तेजस्वी नया क्या करेंगे।










