
उमेश कांत गिरी, ब्यूरो प्रमुख, घाटशिला. झारखंड.
घाटशिला/खबर जिन्दगी: सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्वामी विवेकानंद सभागार में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने दोनों राष्ट्रनायकों के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों से परिचित कराने के साथ ही सत्य, अहिंसा, अनुशासन, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत परीक्षा नियंत्रक मिथिलेश सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता चौधरी ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। इसके बाद महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। मंच संचालन बी.टेक. सीएसई प्रथम सेमेस्टर की छात्रा नेहा बरनवाल ने किया।
विद्यार्थियों ने रखे विचार
जयंती समारोह में विद्यार्थियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। सुमन कुमारी, बी.टेक. सीएसई प्रथम सेमेस्टर ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के विचारों को प्रस्तुत किया।

वहीं डिप्लोमा सिविल प्रथम सेमेस्टर की छात्रा अलीशा टुडू ने दोनों महापुरुषों के जीवन और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। जबकि सुमित्रा कुमारी, डिप्लोमा सीएसई ने कविता प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावपूर्ण बनाया। इस दौरान संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता चौधरी ने महात्मा गांधी के प्रिय भजन “वैष्णव जन तो तेने कहिए” की प्रस्तुति दी।
डॉ. शिवचन्द्र झा ने गांधी और शास्त्री के आदर्शों को बताया
राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिवचन्द्र झा ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के विचारों को सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि महापुरुषों की जयंती स्मरण मात्र नहीं बल्कि आत्मचिंतन करने का भी अवसर है।

उन्होंने बताया कि गांधी जी के विचारों में स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, ग्राम स्वराज, सामाजिक समरसता और मानवता जैसे मूल्य प्रमुख रहे हैं। जबकि लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण से भरा परा था। उन्होंने शास्त्री जी के प्रसिद्ध नारे “जय जवान, जय किसान” का उल्लेख करते हुए देश की सुरक्षा और कृषि के महत्व को बताया।
कुलसचिव डॉ. नीत नयना की युवाओं को आदर्श जीवन अपनाने की अपील
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के माध्यम से समाज को दिशा देने का प्रयास किया, जबकि लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी और समर्पण के लिए जाना जाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा को डिग्री पाने के साथ-साथ चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

जिम्मेदार नागरिक तैयार करना विश्वविद्यालय का कर्तव्य: कुलपति
सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जीवन नैतिकता, मानवीय मूल्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शैक्षणिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। शिक्षण संस्थानों को ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करने पर भी ध्यान देना चाहिए, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें।
कार्यक्रम समापन पर लिया गया संकल्प
कार्यक्रम के अंतिम चरण में परीक्षा नियंत्रक मिथिलेश सिंह ने समापन संबोधन दिया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य, महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री के विचारों की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
अंत में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने दोनों महापुरुषों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लिया।










