
उमेश कांत गिरी, ब्यूरो प्रमुख. घाटशिला. झारखंड
घाटशिला: सोना देवी विश्वविद्यालय में ‘समकालीन वैश्विक परिदृश्य एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ। स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, तकनीक, शोध एवं उच्च शिक्षा में इसकी प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम की शुरुआत संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता चौधरी के वैदिक मंत्रोच्चार से हुई। उद्घाटन सत्र में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह, एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा, कुलसचिव डॉ. नीत नयना सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



सरयू राय ने भारतीय दर्शन और ज्ञान के सामाजिक उपयोग पर की चर्चा
विधायक सरयू राय ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को समझने के लिए उसके मूल दर्शन और व्यापक संदर्भों के अध्ययन पर जोर दिया। उन्होंने आदि शंकराचार्य, शून्य की अवधारणा, स्वामी विवेकानंद तथा रामायण-महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ आधुनिक समस्याओं के समाधान में उसका उपयोग होना चाहिए। ज्ञान का उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ नहीं, बल्कि समाज का कल्याण और मानवीय मूल्यों का विकास भी होना चाहिए।
शोध और नवाचार पर कुलपति ने दिया जोर
कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और तकनीकी विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने शोधार्थियों से मौलिक एवं नवाचारपरक अनुसंधान करने का आह्वान किया।

कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए AI सहित उभरते क्षेत्रों में हो रहे कार्यों और विभिन्न संस्थानों के साथ हुए समझौतों (MoU) का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों से विद्यार्थियों के कौशल विकास और नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
आधुनिक विज्ञान से भारतीय ज्ञान प्रणाली को जोड़ने की जरूरत
डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्य डॉ. मोनिका उप्पल ने वेदों, कौटिल्य के सिद्धांतों और श्रीमद्भगवद्गीता में निहित प्रबंधन एवं नेतृत्व संबंधी विचारों की चर्चा की। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान का आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन करने पर जोर दिया।

एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार ने भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने शोधार्थियों को रोबोटिक्स, ग्रीनहाउस तकनीक और अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों में शोध एवं नवाचार के लिए प्रेरित किया।

उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को मिले स्थान: प्रभाकर सिंह
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि भारत की प्राचीन पहचान ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति की समृद्ध परंपरा से रही है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली को उच्च शिक्षा के केंद्र में लाने की पहल का स्वागत करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई।
कोल्हान विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रागिनी भूषण ने वेदों एवं उपनिषदों के अध्ययन को वर्तमान सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया।

अकादमिक संवाद के साथ हुआ उद्घाटन सत्र का समापन
सेमिनार के प्रथम दिन वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की समकालीन प्रासंगिकता और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के साथ उसके समन्वय पर विचार रखे। कार्यक्रम ने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अकादमिक संवाद का अवसर प्रदान किया।

अंत में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन डॉ. कंचन सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रगान के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ। यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार से जोड़ने की दिशा में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण पहल रहा।










