दुनिया भर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में मची हलचल। रिसर्च के लिए उमड़े वैज्ञानिक

1 जुलाई 2025 को, चिली के ‘एस्टरॉयड टेरेस्ट्रियल-इम्पैक्ट लास्ट अलर्ट सिस्टम’ (ATLAS) को आसमान में एक चमकती चीज देखी। इसने दुनिया के सारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में हलचल मचा दी है। पहले तो लगा कोई साधारण धूमकेतु है, लेकिन जल्दी ही पता चला यह सौरमंडल के बाहर से आया अंतरिक्ष का भटकता यात्री है। यह हमारे सौरमंडल में आने वाला तीसरा अंतरतारकीय धूमकेतु है। यानी ये किसी अज्ञात सौरमंडल से आया है। इसे नाम दिया गया 3I/ATLAS
29-30 अक्टूबर को यह धूमकेतु सूर्य के सबसे नजदीक रहा। यह पृथ्वी और मंगल के बीच से गुजरा। इस दौरान सूर्य की गर्मी से इसकी बर्फीली सतह पिघल गई जिससे एक चमकदार कोमा(धुंधला आवरण)और एक लंबी पूंछ बन गई। दुनिया भर के वैज्ञानिक इसकी अनोखी विशेषताओं को समझने में लगे हुए हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया कि इसकी गति 2 लाख किलोमीटर /घंटा है और इसकी भ्रमण दिशा निश्चित नहीं लग रही। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें कुछ असामान्य व्यवहार देखे गये हैं। हावर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अवी लोएब का मानना है कि यह कोई साधारण अंतरिक्षीय पिंड नहीं बल्कि एलियन तकनीक से लैस कोई सर्विलांस यंत्र हो सकता है। वैज्ञानिकों की माने ये हमारे सौर मंडल से भी पुराना हो सकता है।
3I/ATLAS प्रति सेकंड करीब चार ग्राम निकल उत्सर्जित कर रहा है, लेकिन इसमें लोहा बिल्कुल नहीं है। जबकि ये दोनों तत्व लगभग हमेशा साथ पाए जाते हैं। इसमें निकल टेट्राकार्बोनिल का पता लगाया गया है। शुरुआत में 3I/ATLAS की एक पूंछ सूर्य की ओर दिखाई दी, बाद में यह पूंछ सूर्य से दूर मुड़ गई।
19 दिसंबर 2025 को यह पृथ्वी के सबसे करीब आएगा लेकिन यह लगभग 1.8 खगोलीय इकाइयों(लगभग 27 करोड़ किमी)की बेहद सुरक्षित दूरी पर रहेगा। यह दूरी इतनी अधिक है कि किसी भी तरह के टकराव की कोई संभावना नहीं है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इसकी अनोखी विशेषताओं को समझने और अंतरिक्ष सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए इस पर लगातार नजर रख रहे हैं।








