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Home बिहार मुजफ्फरपुर

150 सालों में मुजफ्फरपुर ने देखे कई रंग..स्थापना दिवस पर विशेष

Sandeepak Kumar by Sandeepak Kumar
December 31, 2025
in मुजफ्फरपुर, समीक्षा
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शाही लीची के लिए प्रसिद्ध जिसका स्वाद विदेशों तक में मशहूर है, एक शहर के रूप में मुजफ्फरपुर का परिचय कराती है। इसकी स्थापना मुग़ल सरकार के अधीन एक अमिल या राजस्व अधिकारी मुज़फ्फरखान के नाम पर की गई थी। लेकिन एक जिले के रूप में इसका गठन तत्कालीन तिरहुत जिले(जिसके अंतर्गत मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण) से पृथक कर 1 जनवरी 1875 को किया गया था। जिसके बाद दरभंगा को पूर्वी तिरहुत और मुजफ्फरपुर को पश्चिम तिरहुत के रूप में बांटा गया। जिसकी पुष्टि 1875 में प्रकाशित  ‘द स्टेट्समैन, अख़बार से होती है। साथ ही एल. एस. एस. ओ’ मैली द्वारा लिखित बंगाल डिस्ट्रिक गजेटियरस मुजफ्फरपुर एवं पी. सी. रॉय चौधरी द्वारा लिखित बिहार डिस्ट्रिक गजेटियरस मुजफ्फरपुर में भी इसका जिक्र मिलता है।

आगे के आलेख में हम तिरहुत के स्थापत्य और इतिहास के बारे में भी बात करेंगे जिससे पृथक होकर मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिला बना और इसी ने तिरहुत को प्रमंडल के रूप में एक नई पहचान दिलाई। इसके पहले मध्यकालीन भारत के समयकाल में 1764 में बक्सर की लडाई के बाद यह तिरहुत का क्षेत्र सीधे तौर पर अंग्रेजी हुकूमत के अधीन हो गया था। 1782 में मुजफ्फरपुर को तिरहुत जिले का मुख्यालय बनाया गया, जिसमें उस समय मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर क्षेत्र शामिल थे। जनवरी 1875 में, अंतिम तीन क्षेत्रों जिसमें दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर शामिल थे को अलग करके दरभंगा जिला बनाया गया, जबकि मुजफ्फरपुर शहर मुजफ्फरपुर जिले का मुख्यालय बना रहा (और ‘तिरहुत’ शब्द कुछ समय के लिए (1875-1907) प्रशासनिक अभिलेखों से गायब हो गया)।

जब मुजफ्फरपुर जिले का निर्माण हुआ तब वैशाली, सीतामढ़ी और चंपारण के क्षेत्रों को मिलाकर कुल 13,183 गाँव थे, जो 36 परगनों में विभाजित थे और लगभग 13 लाख रुपये का राजस्व (भू-राजस्व, सड़क उपकर और सार्वजनिक निर्माण) प्राप्त होता था, जिसे कलेक्टर के खजाने में जमा किया जाता था। 1907 में तिरहुत नाम फिर से उभरा और  मुजफ्फरपुर को तिरहुत (आयुक्त) मंडल का मुख्यालय बनाया गया, जिसमें सारण, चंपारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जिले शामिल थे।जिसकी पुष्टि मोहम्मद सज्जाद द्वारा लिखित पुस्तक कांटेस्टिंग कॉलोनियालिज्म एंड सेपरेटिज्म मुस्लिम ऑफ मुजफ्फरपुर सिंस 1857 से होती है। वर्तमान में तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत कुल छः जिले है जिनमे मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, शिवहर, वैशाली एवं सीतामढ़ी ( पुनौरा धाम के लिए प्रसिद्ध है, जिसे माता सीता की जन्मस्थली माना जाता है) शामिल है।

मुजफ्फरपुर में स्वाधीनता आंदोलन

मुजफ्फरपुर ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अत्यंत महत्वपूरण भूमिका निभाई। महात्मा गाँधी की दो यात्राओं ने इस क्षेत्र के लोगों में स्वाधीनता के चाह की नयी जान फूँकी थी। शहीद वरिस अली, खुदीराम बोस, प्रफुल्ल चाकी, भगवन दास, वैकुण्ठ शुक्ल, जुब्बा सहनी, पण्डित सहदेव झा, एवं जोगेंद्र शुक्ल एवं मुजफ्फरपुर के कला पानी सजायाफ्ता रामदीद शाही, केदई शाही, पुलक तिवारी, शेख कुर्बान अली, भागीरथ गवाला जैसे अनेक क्रांतिकारियों की यह कर्मभूमि रही है। जो की 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1930 के नमक आन्दोलन एवं 1942 के भारत छोडो आन्दोलन के समय तक यहाँ के क्रांतिकारियों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे है।

मुजफ्फरपुर आज

मुजफ्फरपुर शहर में दाता कम्बल शाह मजार दरगाह एवं महादेव का बहुत बङा स्थान है जहां मन से मांगे हर मनोकामना को पूरा होते लोगो ने देखा है। जिसका नाम बाबा गरीबनाथ धाम है, इसके अलावे देवी मंदिर, मां बंग्लामुखी मंदिर भी यहां प्रसिद्ध है। मुजफ्फरपुर को इस्लामी और हिन्दू सभ्यताओं की मिलन स्थली के रूप में भी देखा जाता रहा है। दोनों सभ्यताओं के रंग यहाँ गहरे मिले हुये हैं और यही इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।

Tags: 150 Years1875Foundation DayMuzaffar KhanmuzaffarpurTirhut
Sandeepak Kumar

Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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