
घर के नजदीक स्थानांतरित कराकर पहुंचने का सपना तो पूरा हो गया लेकिन हाथें तंग हो गई। ये स्थिति सिर्फ मुजफ्फरपुर के सैकड़ों शिक्षकों के साथ ही नहीं बल्कि सूबे के हजारों शिक्षक के साथ हैं और अपने वेतन से वंचित हैं।
स्थानांतरण तो शिक्षकों का हो गया, लेकिन पदस्थापन के इंतजार में अब तक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। इस वजह से HRMS पर उनका ऑनबोर्ड नहीं हो पाया और न ही उन्हें स्कूल आवंटित किया गया।
नियोजित और विशिष्ट शिक्षक से पदोन्नत होकर प्रधान शिक्षक भी बन गए लेकिन अब तक ना ही उनका HRMS conversation हुआ और न ही पुराने से नए वेतनमान में उन्हें कोई वित्तिय वृद्धि प्राप्त हुई। विभाग की लापरवाही से स्थानांतरित होकर आए शिक्षकों का IN और OUT का पेंच फंसा हुआ है और विभाग में कार्यरत कर्मचारी कान में तेल डाल कर सोए हुए हैं
इन सब के बीच बिचौलियों की चांदी कट रही है। शिक्षक की परेशानियों का फायदा बिचौलिए उठाने में लगे हुए हैं। इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता दिख रहा है। शिक्षकों ने नाम न छापने का आग्रह करते हुए कहा कि विभाग के कर्मचारियों द्वारा नाम IN और OUT की एंट्री करने के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं। पैसा न देने के कारण ये समस्या बनी हुई है।
कुछ तो ऐसे शिक्षक हैं जिनका स्थानांतरण तो हो गया लेकिन पदस्थ स्कूल से उन्हें OUT ही नहीं किया गया जबकि उन्हें पुराने स्कूल से विरमित कर दिया गया है।
अब छठ पर्व पर भी वेतन नहीं दिए जाने से शिक्षकों में आक्रोश देखा जा रहा है और चुनाव भी सर पर है।








