
जानबूझ कर साजिश के तहत 2013 मॉडल की i20 कार खरीदी गई और इसी से पूरी साजिश रची गई। सबसे पहले गुरुग्राम के रहने वाले मोहम्मद सलमान ने ये कार खरीदी और कई हाथों से होता हुआ अंत में फरवरी में पुलवामा, कश्मीर के रहने वाले तारिक ने खरीदी। लालकिला विस्फोट का पूरा मॉड्यूल कश्मीर में ही तय हुआ था। इस घटना को अंजाम देने का स्टेज बाय स्टेज पूरी प्लानिंग लगभग 3 साल पहले से की जा रही थी।
जानबूझ कर प्रोफेशनल के तौर पर डॉक्टर को ही चुना गया। 4-4 डॉक्टरों की फौज खड़ी कर कश्मीर से लेकर दिल्ली के नजदीक हरियाणा और लखनऊ तक जाल फैलाया गया। फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया गया। यह पुलवामा का रहने वाला था। वैसे फरीदाबाद और गुरुग्राम दोनों दिल्ली NCR के क्षेत्र में ही आते हैं। क्यूंकि गुरुग्राम में ही ये कार खरीदी गई थी। कार की पूरी कहानी आगे बताते हैं। फिलहाल तो डॉ. मुजम्मिल तक पहुंचने का क्लू कश्मीर से मिला क्यूंकि असल खेल यही से शुरू हुआ था।
श्रीनगर के नौगाम इलाके में एक पोस्टर लगा था जिसपर अक्टूबर में श्रीनगर के SSP जी. वी. सुनीप चक्रवर्ती का ध्यान गया, जिसमें साफ साफ शब्दों में सुरक्षाबलों को चेतावनी दी गई थी। उन्होंने इसकी जांच प्रारंभ की तो छानबीन के दौरान सीसीटीवी फुटेज से पहला क्लू मिला जिसमें 3 लोगों को पोस्टर लगाते देखा गया। जल्द ही इनकी गिरफ्तारी की गई। कड़ाई से पूछने पर इन्होंने शोपियां के मौलवी इरफान अहमद का नाम लिया। यही पहली कड़ी थी जिसके बाद से आतंक फैलाने के सारे पन्ने खुलने लगे।
इरफान को गिरफ्तार कर जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो इसने अपने एक और सहयोगी गांदरबल के जमीर अहमद आहंगर उर्फ मुल्तसा का नाम लिया। इन दोनों के मोबाइल से टेलीग्राम चैनल के जरिए पाकिस्तान स्थित जैश आतंकी उमर बिन खत्ताब से दिशा निर्देश प्राप्त करने का सबूत मिला और मुल्तसा पैन इंडिया आतंकी चैट ग्रुप का सदस्य भी है। मुल्तसा ने ही सबसे पहले डॉ. मुजम्मिल का नाम लिया और बताया कि इसके यहां AK47 रखी गई है।
इसके बाद जम्मू पुलिस फरीदाबाद आती है और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार करती है जहां से 2900 किलो विस्फोटक और बम बनाने की सामग्री बरामद की गई। मुजम्मिल के निशानदेही पर डॉ. शाहीन सईद जो कि मुजम्मिल की कथित प्रेमिका बताई जा रही है और डॉ. आदिल अहमद राथर को सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया। इसी कड़ी में मेवात के मौलवी हाफिज मोहम्मद इस्तियाक को भी गिरफ्तार किया गया। हाफिज ने इन सब को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था।
अब कार की कहानी समझिए। मोहम्मद सलमान ने मई जून 2024 के लगभग कार को ओखला के देवेंद्र को बेच दी। इसके बाद कार अंबाला में भी किसी के पास रही फिर यह कार पुलवामा के तारिक ने खरीदी। तारिक ने यह कार डॉ. उमर को दी। डॉ. उमर तक पुलिस जब तक पहुंचती तब तक तो उमर ने गिरफ्तारी के डर से घबराहट में सोमवार को लालकिले के पास कार विस्फोट करा दिया जिसमें 13 लोगों की जान चली गई और दो दर्जन से ज्यादा घायल हो गए।








