कहा जाता है कि बच्चे को एक तो अच्छे से पढ़ाइए लिखाए, या तो बड़े बुद्धिमानो के सानिध्य में रखे जिससे बच्चा समझदार बने और अच्छे-बुरे की समझ भी विकसित हो। बच्चे की एक नासमझी पूरे परिवार को तहस नहस कर सकती है।
हम बात कर रहे हैं लालू यादव और राबड़ी देवी के छोटे बेटे और राजद के विधायक दल के नेता तेजस्वी की। बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। अंग्रेजी भी बोलना सिख लिया है, ये अलग बात है कि हिंदी या उर्दू के क्लिष्ट शब्दों में इनकी जबान फसने लगती है, क्यूंकि दसवीं पास नहीं कर पाए। तेजस्वी की करतूत ने 20 सालों की बसी बसाई गृहस्थी उजाड़ दिया। 20 सालों से लालू राबड़ी जिस सरकारी मकान में रह रहे थे अब उन्हें वो छोड़ना पड़ेगा। दअरसल नीतीश सरकार के भवन निर्माण विभाग ने पूर्व सीएम राबड़ी देवी को विधान परिषद में विपक्ष की नेता के हैसियत से मिले 10 सर्कुलर रोड वाले बंगले का आवंटन रद्द कर दिया है।
राबड़ी देवी का यह आवास बतौर पूर्व सीएम उनके पास रह सकता था लेकिन उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा डिप्टी सीएम के उनके आवास को लेकर दायर एक केस की सुनवाई के दौरान पटना high Court ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके जरिए राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को तमाम सुविधाएं बंगला से लेकर सुरक्षा तक सरकारी खर्चे पर दी जा रही थी।
अब तक नीतीश और लालू यादव का बंगला आमने सामने था, लेकिन अब बड़े भाई और छोटे भाई के बीच की दूरी 200 मीटर की हो जाएगी। तेजस्वी अहंकार और सीनाजोड़ी के कारण माता पिता के लिए गुनहगार बन गए। अब उन्हें हार्डिंग रोड पर 39 नंबर का बंगला अलॉट हुआ है। इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। राजद के नेता शक्ति सिंह यादव ने इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है। इन्होंने आरोप लगाया है कि यह सरकार में बढ़ते बीजेपी के दखल का परिणाम है।
अब सरकार का नियम कहें या High Court का हस्तक्षेप या राजनीतिज्ञों की आपसी प्रतिद्वंदिता लेकिन तेजस्वी के अहंकार ने या इसको दूसरे शब्दों में कहिए तो बेटे के करतूत ने ही पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी को आखिरकार 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करना होगा।








