आखिर बच्चों का क्या कसूर..

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मां का साया उठा..पिता शराबी बच्चे दरबदर ठोकरें खाने को मजबूर

अशिक्षा और नशा कभी भी एक सभ्य समाज का निर्माण नहीं कर सकता। और इसी की पुनरावृति होती दिखी बगहा स्टेशन पर। भला हो आरपीएफ पुलिस का जिनकी नजर में ये बच्चे आ गए और इन्हें चाइल्डलाइन को सुपुर्द कर दिया गया।

बगहा आरपीएफ प्रभारी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि बगहा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर छठ पर्व पर वापस जा रहे यात्रियों के लिए आरपीएफ के सिपाही उमेश यादव और राजेश कुमार को भीड़ नियंत्रण और बंदोबस्त के लिए ड्यूटी पर लगाया गया था। तभी उनकी नजर इन 3 छोटे छोटे बच्चों पर पड़ी। जो वहां यात्रियों से भीख मांग रहे थे। पुलिस जब बच्चे के पास पहुंची तो बच्चे डर से रोने लगे। आरपीएफ जवानों ने बच्चों को पुचकार कर चुप कराया।

आरपीएफ पुलिस के पूछने पर बच्चों ने अपना अपना नाम कुसुम कुमारी 08 वर्ष, सत्या कुमार 07 वर्ष, ऐसूर्य कुमार 06 वर्ष बताया और पिता का नाम नंदकिशोर शाह बताया। वो तीनों सगे भाई बहन हैं और उनकी मां की मृत्यु हो चुकी है, और पिता शराब पीते हैं। पिता ने खेत और घर बेच दिए हैं और उन लोगों को स्टेशन पर लाकर छोड़ दिया हैं और पता नहीं कहां चले गए हैं। वे दो दिनों से स्टेशन पर रह रहे हैं और मांग कर खा रहे हैं।

बरामद बच्चों ने अपना घर बगहा के वार्ड 13 कोइरिया टोला डुमावलिया, बताया।आरपीएफ प्रभारी ने बताया कि उक्त तीनों बच्चों को चाइल्ड लाइन नरकटियागंज के वर्कर सालमगिर आलम तथा वर्कर शीला गुप्ता को सुपुर्द कर दिया गया।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें