मुजफ्फरपुर: नाबालिग छात्रा अपहरण-दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल की सजा, प्रशासनिक कार्रवाई भी रही चर्चा में

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सामाजिक संगठन “ब्रह्मर्षि विकास संगठन, मुजफ्फरपुर” का प्रयास भी पीड़िता को न्याय दिलाने में रहा सहायक

मुजफ्फरपुर। तुर्की थाना क्षेत्र के दरियापुर कफेन गांव में मई 2025 में हुए नाबालिग छात्रा के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में अदालत ने अगस्त 2026 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले के मुख्य आरोपी दरियापुर कफेन निवासी मुकेश कुमार राय को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया।

मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी क्षेत्र में काफी चर्चा हुई थी। राजनीतिक प्रभाव के कारण मामला दब से गया था।लेकिन सामाजिक संगठन “ब्रह्मर्षि विकास संगठन, मुजफ्फरपुर” के अथक प्रयास ने पीड़िता को न्याय दिलाने में मदद की। पीड़िता आठवीं कक्षा की छात्रा थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने छात्रा को उपहार दिलाने का झांसा देकर कार से अपने साथ ले गया था। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई।

फरार आरोपी पर प्रशासन ने कसा शिकंजा
घटना के बाद आरोपी के फरार रहने के दौरान प्रशासन के ऊपर जब स्थानीय और बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे विजय कुमार सिन्हा का दबाव बढ़ा तब जाकर इस केस में सख्ती दिखाई। जून 2025 में न्यायालय के आदेश के तहत आरोपी के घर और उससे जुड़े बताए गए होटल/ढाबे के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई थी। तब जाकर आरोपी ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की।

स्पीडी ट्रायल के जरिए हुई सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक प्रक्रिया में त्वरित सुनवाई का सहारा लिया गया। एक साल के अंदर अदालत द्वारा सुनवाई पूरी कर दोषी को 20 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद अब आरोपी जेल में अपनी सजा काट रहा है।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका संदिग्ध

इस मामले में पुलिस और चिकित्सा व्यवस्था की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों के बाद तुर्की थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी प्रमोद कुमार सिंह समेत कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी, तथा इलाज में कथित देरी और लापरवाही के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई थी। पटना और मुजफ्फरपुर की चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।

सामाजिक संगठनों ने भी उठाई थी आवाज
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक संगठनों और लोगों ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई थी। ब्रह्मर्षि विकास संगठन, मुजफ्फरपुर के महासचिव सुनील कुमार समेत संगठन से जुड़े लोगों द्वारा मामले को लेकर प्रशासन के समक्ष स्थानीय प्रशासन को लेकर कड़ा ऐतराज जताया था। सुनील कुमार ने बताया कि आरोपी के ऊपर एक राजनेता का हाथ था जिसके कारण प्रशासन आरोपी के ऊपर हाथ डालने से डर रही थी। लेकिन जब तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा प्रशासन को फटकार लगाई तब जाकर मामले में तेजी आई और आरोपी की आत्मसमर्पण करना पड़ा। इसका उदहारण इस बात से लगाया जा सकता है कि मामले में स्थानीय थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया था।

आरोपी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, न्यायालय की सुनवाई और दोष सिद्ध होने के बाद सजा, ये सभी कदम यह स्पष्ट करते हैं कि गंभीर अपराधों के मामलों में कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से कार्रवाई होना जरूरी है।

घटना को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की भूमिकाओं पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। किसी अपराध को जाति, समुदाय या राजनीतिक पहचान से जोड़ने के बजाय आरोपी के व्यक्तिगत कृत्य और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर ध्यान देना ही उचित है। अपराध की कोई जाति नहीं होती और न्याय की कसौटी भी सभी के लिए समान होनी चाहिए।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य अदालत का फैसला है। 20 वर्ष की कठोर सजा के साथ न्यायिक प्रक्रिया ने यह संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों में दोष सिद्ध होने पर कानून के तहत कठोर दंड दिया जा सकता है।
अब इस मामले को राजनीतिक या जातीय बहस से आगे ले जाकर पीड़ित परिवार की गरिमा, कानून के शासन और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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