जिनके सहारे हुआ रिकॉर्ड मतदान, वो ही हुए मतदान से वंचित

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मुजफ्फरपुर जिले के ग्यारहों विधानसभा में रिकॉर्डतोड़ मतदान हुआ। कई पुराने रिकॉर्ड धराशाई हो गए। मतदाता से मतदानकर्मी तक सब बूथों पर बढ़िया परफॉर्मेंस शाम तक करते रहे, शिवाय मुजफ्फरपुर के। अब मुजफ्फरपुर ठहरा शहरी क्षेत्र, हमेशा की तरह सुस्त, काम के बोझ का मारा और मिल न पाया सिंकारा।

खैर कोई बात नहीं, लेकिन एक बात जो इन सब प्रक्रिया के बीच दिखी, वो संभावित निराशा के बीच मतदानकर्मियों की जीतोड़ मेहनत। संभावित निराशा इसलिए कह रहा हूं कि शुरुआती दिनों से जब से आचार संहिता लागू हुई या यूं कहें कि जब से विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई तब से इनकी मेहनत दिख रही है। लेकिन ऐन मौके पर ये ही मतदान न कर पाए तो इन्हें ऐसा लगा होगा, जैसे किसी उत्सव में खाने के मेज पर प्लेट तो रखा है पर खाना खत्म।

ये परिस्थिति किसी एक या दो के साथ नहीं बल्कि शिक्षकेतर वर्ग से ओमप्रकाश, इन्द्रजीत कुमार-बूथ नंबर-30, स्मिता कुमारी-बूथ नंबर-30, अंगद कुमार -मिडल स्कूल जुरन छपरा मुजफ्फरपुर, मनोज कुमार- बूथ- रात्री पाठशाला ब्रह्मपुरा जैसे कई शिक्षक वैसे मतदानकर्मी रहे जो खुद का ही वोट नहीं दे पाए। इनके अनुसार इनका पोस्टल बैलेट जारी कर दिया गए था। साथ ही प्रथम चुनाव प्रशिक्षण के बाद द्वितीय चुनाव प्रशिक्षण से इन्हें अलग कर दिया गया और बुलाया भी नहीं गया।  द्वितीय चुनाव प्रशिक्षण के दिन मतदानकर्मी का मतदान पोस्टल बैलेट से करवाया गया जिसकी जानकारी इनको नहीं मिल पायी और इनका मतदान नहीं हो पाया।

वैसे तो मतदाता सूची में नाम और मतदान के समय जरूरी दस्तावेज दिखाने के बावजूद अगर किसी को मतदान न करने दिया जाए तो लोकतंत्र की भाषा में इसे मताधिकार का उल्लंघन और संविधान की नजर में मानवाधिकार का उल्लंघन माना जाता है। आशा करता हूं कि खबर पढ़कर चुनाव आयोग, शायद इन मताधिकार से वंचित मतदानकर्मियों के मतदान की कुछ व्यवस्था कर पाए।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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