पुलिस ने इस नक्सली पर डेढ़ करोड़ का इनाम रखा था। जो भी इसे पकड़ने में पुलिस की मदद करेगा उसे डेढ़ करोड़ का इनाम दिया जाएगा। लेकिन इसके खौफ से कोई भी मदद को नहीं आया। आखिरकार मंगलवार को पुलिस फोर्स से मुठभेड़ में यह पति-पत्नी दोनों मारे गए और इस तरह करोड़पति नक्सली की प्रेमकहानी का भी खात्मा हो गया।
माड़वी हिड़मा नाम था इस नक्सली का, जो कि सुकमा छत्तीसगढ़ के पूवर्ति गांव का रहने वाला था। इसके ऊपर 300 से ज्यादा हत्याओं का मुकदमा दर्ज था। सबसे ज्यादा पुलिस और नेताओं की जान ली थी इसने। जितना यह खूंखार था उतनी ही मर्मस्पर्शी इसकी प्रेमकहानी थी। जिससे प्रेम करता था उसके ना को नजरअंदाज कर उसके दिल में जगह बनाने की कोशिश करता रहा।
हिड़मा के साथी नक्सली जिन्होंने बाद में आत्मसमर्पण किया था उन्होंने बताया कि इसकी मुलाकात जब नक्सली लड़की राजे उर्फ राजक्का से हुई थी, पहली नजर में ही राजे इसे भा गई थी। हिड़मा ने राजे के सामने अपने प्रेम का इजहार किया लेकिन राजे ने इंकार कर दिया। फिर भी 2 सालों तक हिड़मा राजे को प्रपोज करता रहा साथ ही साथी नक्सलियों से भी सिफारिश करवाता रहा। अंततः 2 साल बाद राजे ने हिड़मा का प्रेम आग्रह स्वीकार किया।
इसके नक्सली साथी बताते हैं कि शादी से पहले इसने राजे को इस बात के लिए भी राजी किया कि दोनों माता-पिता नहीं बनेंगे। हिड़मा ने पहले अपनी नसबंदी करवाई तब उसने शादी किया। असल में नक्सलियों में एक नियम था कि संगठन में शादी करने पर बच्चे पैदा करने पर पाबंदी थी और हिड़मा नियम का बहुत ही सख्त था।
हिड़मा की राजे से मुलाकात
हिड़मा लगभग 25 साल पहले संगठन की एक मीटिंग में गया था और वही नक्सली राजे से मुलाकात हुई थी। उस समय राजे जगरगुंडा इलाके की ACM हुआ करती थी और हिड़मा मध्यप्रदेश के बालाघाट रीजन में था। इसी पहली मुलाकात में हिड़मा अपना दिल से बैठा। लेकिन राजे की हां के लिए हिड़मा को 2 साल का इंतजार करना पड़ा।
2 साल बाद शादी कर माड़वी हिड़मा जब अपने गांव पूवर्ति गया तो उसे अपनी मां की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। इसने अपनी मां को शादी के बारे में जानकारी नहीं दी थी। जिससे मां नाराज थी हालांकि बाद में वो मान गई थी। जब ये दोनों मां का आशीर्वाद लेने गांव गए थे तो किसी शादी में नहीं गए थे बल्कि नक्सलियों की वर्दी में गए थे और कंधे पर एक47 था।
इधर फोर्स का कहर नक्सलियों पर बरसना शुरू हो चुका था। कई सारे नक्सली मारे जा रहे थे और कईयों ने सरेंडर भी किया था। पुलिस के कहर को देखते हुए हिड़मा की मां ने भी हिड़मा को नक्सल का रास्ता छोड़ गांव वापस आने को बोल रही थी। हिड़मा की नक्सली पत्नी ने भी कई बार हिड़मा को सरेंडर करने को कहा लेकिन हिड़मा जितना खूंखार था उतना ही खुद्दार भी था। कहता था कि भले ही जान चली जाए लेकिन आत्मसर्पण नहीं करूंगा।
इसी बीच मुखबिरों से फोर्स को सूचना मिली कि हिड़मा और राजे अपने 6 साथियों के साथ छत्तीसगढ़-आंध्रप्रदेश बॉर्डर अल्लूरि सीताराम राजू जिले के समीप मरेडमिल्ली जंगल में छिपे हुए हैं। 18 नवंबर को फोर्स ने पूरे जंगल को चारों तरफ से घेर लिया जहां पर एनकाउंटर में अपने चार नक्सली साथी सहित माड़वी हिड़मा और इसकी पत्नी राजे दोनों मारे गए। और इस तरह से एक प्रेम कहानी और खूंखार नक्सली का आतंक समाप्त हुआ।








