मुजफ्फरपुर: पुलिस अधिकारियों की समीक्षा बैठक में उजागर हुआ निकम्मापन; किस पर गिरेगी गाज

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मुजफ्फरपुर: मंगलवार को पुलिस उप-महानिरीक्षक, तिरहुत की अध्यक्षता में पुलिस अधिकारियों की मासिक समीक्षा बैठक हुआ। इस बैठक के बाद एक प्रेस नोट जारी किया गया, जिसमें सीधे सीधे पुलिस के निकम्मेपन का खुलासा हुआ।

पुलिस उप-महानिरीक्षक, तिरहुत क्षेत्र की अध्यक्षता में क्षेत्र के पुलिस अधीक्षकों के साथ मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें तिरहुत वरीय पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर, पुलिस अधीक्षक, सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर एवं पुलिस अधीक्षक नगर/ग्रामीण मुजफ्फरपुर उपस्थित हुए। इस बैठक में सालों से अटके मुकदमों के निष्पादन, अपराध नियंत्रण एवं विधि-व्यवस्था संधारण बेहतर करने का दिशा-निर्देश दिया गया

सड़कों पर लूट एवं छिनतई जैसी घटना के नियंत्रण एवं त्वरित उद्भेदन हेतु SIT का गठन कर घटना में शामिल अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार करने एवं लूटे गये सामान की बरामदगी करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर या तिरहुत क्षेत्र में विशेष नाका का गठन और मुख्य बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड एवं अन्य भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में गश्ती बढ़ाने का निर्देश सभी पुलिस अधीक्षकों को दिया गया। अब तक पुलिस क्या कर रही थी फिर। इतने लोगों के साथ घटना घट गई, आखिर पुलिस की फाइलों में कितने मामले दर्ज हुए हैं।

इसके अलावा पुलिस अधिक अपराध वाले जगहों पर  Hot-Spot स्थलों को चिन्हित कर सी०टी०वी० कैमरे से आच्छादित करने एवं कारगर गश्ती के माध्यम से निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। मुजफ्फरपुर में स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट के तहत सैकड़ों कैमरे लगे है लेकिन इसका इस्तेमाल अब तक चालान काटने भर के लिए होता है। शहर पर निगरानी की बात तो भूल ही जाइए।

राष्ट्रीय राज्य मार्ग एवं मुख्य सड़कों पर की जा रही अवैध पार्किंग को अविलंब हटवाने एवं रोकने का निर्देश सभी पुलिस अधीक्षकों को दिया गया। मुजफ्फरपुर में सर्विस रोड के साथ साथ NH की स्थिति को देखिए, जहां आये दिन अवैध पार्किंग को लेकर जाम की स्थिति बनी रही है और पुलिस आंखों पर काला चश्मा लगाए बस देखती रही है। इसके अलावा कोर्ट, समाहरणालय, शॉपिंग मॉल प्रमुख कार्यालय/प्रतिष्ठान के समीप जहाँ अधिक वाहनों का आवागमन एवं ठहराव होता है ऐसे स्थानों पर एवं सामान्य एवं पैदल गश्ती कराने का निर्देश दिया गया। ये बस निर्देश भर ही रहेगा। पुलिस कितना गश्त करती है ये आम जनता के साथ साथ पुलिस को भी पता है।

जिलों के वैसे अपराधकर्मी जो जमानत पर छूट कर पुनः अपराध कार्य में संलिप्त हैं, वैसे 05 अपराधियों का जमानत रद्दीकरण का प्रस्ताव माननीय न्यायालय में समर्पित किया गया है, जिसमें से 03 मामले में माननीय न्यायालय द्वारा जमानत रद्दीकरण का आदेश पारित किया गया है। क्षेत्रान्तर्गत के ऐसे करीब 100 से अधिक अपराधियों को चिन्हित किया गया है जिसका जमानत रद्दीकरण प्रस्ताव शीघ्र माननीय न्यायालय में समर्पित करने का निर्देश दिया गया। सही है होना भी चाहिए लेकिन यह नहीं बताया गया कि जितनो के जमानत रद्द हुए हैं उनमें से कितने अपराधियों को पकड़ कर वापस जेल भेजने की प्रक्रिया हुई है।

जिले के लंबित कांडों के निष्पादन की समीक्षा के दौरान पाया गया कि तिरहुत क्षेत्रान्तर्गत के जिलों में कुल 3699 कांड दर्ज किये गये थे, लेकिन कितने कांडों का निष्पादन किया गया ये शायद पुलिस की फाइलों में दर्ज नहीं की गई है क्योंकि उसकी संख्या नहीं बताई गई।

6. *समीक्षा के क्रम में जिले के सभी पुलिस अधीक्षकों* को जिले में पदस्थापित सभी अनुसंधानकर्ताओं को कांडों के निष्पादन एवं अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु लक्ष्य निर्धारित कर इसका अनुश्रवण करने का निर्देश दिया गया।

7. *समीक्षा के क्रम में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर-01 सीतामढ़ी* द्वारा विशेष कोटि के प्रतिवेदित 342 कांडों की तुलना में 427 कांडों का निष्पादन कराया गया है। इसी प्रकार अंचल पुलिस निरीक्षक, रीगा एवं सीतामढ़ी द्वारा अविशेष कोटी के प्रतिवेदित कांडों की तुलना में अधिक कांडों का निष्पादन कराया गया है, जो सराहनीय है। इस प्रशंसनीय कार्य के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर-01 सीतामढ़ी एवं अंचल पुलिस निरीक्षक, सीतामढ़ी एवं रीगा को प्रशस्ति पत्र दिया जा रहा है।


कुर्की जब्ती के आदेश की भी थोड़ी बात कर ली जाए जिसमें समीक्षा के क्रम में पाया गया कि क्षेत्रान्तर्गत जिलों में कांडों में फरार अभियुक्तों के विरूद्ध 707 वारंट, 191 इश्तेहार एवं 210 कुर्की जप्ती अधिपत्र प्राप्त है जिसपर कोई संज्ञान ही नहीं लिया गया है। क्या पुलिस कान में तेल डाल कर सोई है या न्यायालय का कोई भय ही नहीं है।

पुलिस के पास कोई प्राथमिक दर्ज करने की बात आए तो पहले तो थाने के चक्कर लगाना पड़ता है कि लोग पस्त हो जाते हैं। थानों के छेत्राधिकार की बात पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करती है और अगर प्राथमिकी दर्ज हो भी जाए तो निष्पादन होने में इतना समय लग जाता है कि उस न्याय या सज़ा का कोई मतलब नहीं होता है।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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