सिंधु जल संधि पर फिर बढ़ रहा भारत-पाकिस्तान तनाव? पाक की फिर से गीदड़भभकी

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जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने “सिंधु जल संधि” को बताया राज्य के साथ अन्याय

नई दिल्ली/इस्लामाबाद
भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की लगातार आक्रामक बयानबाजी, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की उच्चस्तरीय सैन्य बैठकों और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी की युद्ध संबंधी चेतावनी ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है जो यह साबित करे कि दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बन चुकी है।

इसी बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री  ने सिंधु जल संधि को जम्मू-कश्मीर के साथ हुआ “सबसे बड़ा अन्याय” बताया है। उनका कहना है कि इस समझौते के कारण राज्य का अपनी ही नदियों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार शुरू से इस संधि का विरोध करती रही है क्योंकि इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित प्रभावित हुए।

उमर अब्दुल्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की ओर से तनाव बढ़ाने वाली कोई नई कार्रवाई नहीं की गई है। उनके अनुसार, भारत ने केवल सिंधु जल संधि को स्थगित किया है, जबकि युद्ध जैसी धमकियां पाकिस्तान की ओर से दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर केंद्र सरकार पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष  ने कहा कि यदि सिंधु जल संधि पर दबाव बनाया गया तो पाकिस्तान युद्ध लड़ने से भी पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख  की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में भी सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए “हर आवश्यक कदम” उठाने की बात कही गई।
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री  ने भी भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने के फैसले को अस्वीकार करते हुए कहा कि सिंधु जल संधि अब भी वैध, बाध्यकारी और प्रभावी है तथा इसे कोई भी पक्ष एकतरफा समाप्त या निलंबित नहीं कर सकता।

वहीं भारत ने अपना रुख दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन मिलने के कारण सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता  ने कहा कि इस मुद्दे पर भारत की नीति पहले जैसी ही है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि  वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी जरूर तेज हुई है, लेकिन किसी भी संभावित सैन्य टकराव को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मौजूदा स्थिति को कूटनीतिक तनाव के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आगे की दिशा दोनों देशों के राजनीतिक और राजनयिक कदमों पर निर्भर करेगी।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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