न्यायालय ने कहा- राज्य के छात्रों पर कोई धार्मिक दबाव नहीं
रायपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र के पाठ को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के 12 जून 2026 के आदेश में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे छात्रों को उनकी धार्मिक आस्था के विरुद्ध किसी गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य किया जाए।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने 2 जुलाई को सुनाए गए फैसले में कहा कि याचिका केवल आशंकाओं पर आधारित है और इसे समय से पहले दायर किया गया है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी छात्र के मौलिक अधिकारों के वास्तविक उल्लंघन के ठोस प्रमाण सामने आते हैं, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून 2026 को एक सर्कुलर जारी कर सभी सरकारी स्कूलों में 2026-27 सत्र से सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और शांति मंत्र के साथ महान व्यक्तित्वों के जीवन परिचय को शामिल करने का निर्देश दिया था। वहीं, स्कूल की छुट्टी के समय राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र के पाठ का भी प्रावधान किया गया था।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए तीन याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25, 28, 29 और 30 का उल्लंघन है तथा इससे अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र अपने धर्म से अलग धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए विवश महसूस कर सकते हैं।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल आनंद दादारिया ने अदालत को बताया कि यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। उन्होंने कहा कि आदेश में कहीं भी छात्रों के लिए दंड या अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है और किसी को अपनी धार्मिक मान्यता बदलने या छोड़ने के लिए बाध्य नहीं किया गया है।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आदेश का समग्र अध्ययन करने पर ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि छात्रों पर किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने का दबाव बनाया गया हो। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
बिहार में भी उठा था ऐसा विवाद
इस तरह का विवाद पहले बिहार के सरकारी स्कूलों में भी सामने आया था, जब विद्यालयों में वंदे मातरम् के गायन को लेकर बहस छिड़ी थी। हालांकि समय के साथ वह विवाद शांत हो गया।
इसी बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के सम्मान में एक सरकारी स्कूल का नाम उनके नाम पर रखने की घोषणा भी की है।









