स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
मुजफ्फरपुर/मुशहरी। मुशहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में पिछले तीन दिनों से एक अज्ञात व्यक्ति के अचेत अवस्था में पड़े रहने की खबर ने बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि व्यक्ति की सांसें अब भी चल रही हैं, लेकिन उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। इसके बावजूद उसे बेहतर इलाज के लिए किसी उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर नहीं किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि उक्त व्यक्ति को मुशहरी थाना पुलिस कहीं से लाकर पीएचसी में छोड़ गई थी। हालांकि, इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई स्पष्ट बयान जारी किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि व्यक्ति जीवित है, तो तीन दिनों तक उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही अचेत अवस्था में छोड़ देना गंभीर मानवीय संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है। लोगों का सवाल है कि आखिर एक गंभीर मरीज को समय पर रेफर क्यों नहीं किया गया? क्या सरकारी अस्पतालों में गरीब और लावारिस मरीजों के जीवन की कोई कीमत नहीं रह गई है?
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल चिकित्सा व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का भी मामला बन सकता है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मुशहरी थाना प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा अचेत व्यक्ति को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
(नोट: पुलिस द्वारा व्यक्ति को अस्पताल में छोड़ने का आरोप स्थानीय लोगों का दावा है। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।)









