श्मशान की राख से उठी उम्मीद की रोशनी: ‘अप्पन पाठशाला’ बच्चों को दे रहा आर्थिक स्वाबलंबन

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मार्शल आर्ट के साथ मिथिला पेंटिंग से सजे परिधानों की बिक्री से बच्चे पकड़ रहे शिक्षा से समृद्धि की रफ्तार

मुजफ्फरपुर। जहां आमतौर पर श्मशान घाट का नाम सुनते ही मन में सन्नाटा और उदासी का भाव आता है, वहीं मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर मुक्तिधाम के पास एक ऐसी जगह है जहां जलती चिताओं के बीच से शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी निकल रही है। यह अनूठी पहल है ‘अप्पन पाठशाला’, जिसने पिछले नौ वर्षों से सैकड़ों वंचित बच्चों के जीवन की दिशा बदलने का काम किया है।

मार्च 2017 में समाजसेवी सुमित कुमार द्वारा शुरू की गई यह पाठशाला आज उन बच्चों के लिए उम्मीद का केंद्र बन चुकी है, जो कभी श्मशान घाट के आसपास भटकते थे। आज वही बच्चे किताबों के साथ अपने सपनों को भी आकार दे रहे हैं। रोजाना शाम 4 बजे से 7 बजे तक चलने वाली इस निःशुल्क पाठशाला में 125 से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भरता की सीख
अप्पन पाठशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों को जीवन कौशल भी सिखाए जाते हैं। संस्था ने “शिक्षा से समृद्धि” अभियान के तहत मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग का विशेष प्रशिक्षण शुरू किया है। छात्र-छात्राएं A3 शीट के साथ-साथ बड़ी चादरों, अंगवस्त्रों और पर्दों पर भी पारंपरिक मिथिला कला का अभ्यास कर रहे हैं। बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की बाजार में पहले से ही एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है, जो इस पहल की सफलता का प्रमाण है।

मार्शल आर्ट्स से बढ़ रहा आत्मविश्वास
शिक्षा और कला के साथ-साथ यहां बच्चों को वुशु और अन्य मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि वे आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वास से भी मजबूत बन सकें।

संस्थापक का सपना
संस्थापक सुमित कुमार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। उनका मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर दे।

संस्कृति से जुड़ाव, भविष्य की तैयारी
मधुबनी पेंटिंग की प्रशिक्षक मीनाक्षी कुमारी बच्चों को इस पारंपरिक कला की बारीकियां सिखा रही हैं। इससे बच्चे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ भविष्य में रोजगार के नए अवसर भी तलाश सकेंगे।

आज अप्पन पाठशाला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं। श्मशान की खामोशी के बीच गूंजती बच्चों की पढ़ाई की आवाज यह संदेश देती है कि ज्ञान की रोशनी हर अंधेरे को मिटा सकती है।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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