राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल,कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव; चंपत राय की लेंगे जगह

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लापरवाही’ की ढाल या जवाबदेही से बचाने की कोशिश?

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चढ़ावा चोरी विवाद के बीच बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। सोमवार को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। इसके साथ ही ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मामले में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, उसमें क्या केवल “लापरवाही” कहकर जिम्मेदारी तय करने से बचने की कोशिश की जा रही है?

विडंबना यह है कि जिन कृष्ण मोहन की शिकायत पर चढ़ावा चोरी का मामला दर्ज हुआ, अब वही ट्रस्ट के संचालन की कमान संभालेंगे। इसे कई लोग ट्रस्ट के भीतर जवाबदेही स्थापित करने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि असली जिम्मेदारियों से ध्यान हटाने का प्रयास भी हो सकता है।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चोरी से वे बेहद आहत हैं और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर को प्राप्त करीब 2,800 कीमती वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास मौजूद हैं। सोशल मीडिया पर सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने के आरोपों को उन्होंने निराधार बताया।

इस बीच, विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच के आधार पर दर्ज मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि वे उन्हें तीन दशक से जानते हैं और उनकी सबसे बड़ी गलती केवल अपने सहयोगियों पर अत्यधिक भरोसा करना था। उन्होंने कहा कि चंपत राय पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है, लेकिन उनके भरोसे का गलत फायदा उठाया गया।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि चोरी हुई, गिरफ्तारियां हुईं और जांच एजेंसियां सक्रिय हैं, तो क्या इसे केवल “लापरवाही” मान लेना पर्याप्त है? क्या ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही? और यदि जवाबदेही तय नहीं होगी, तो करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कैसे बहाल होगा?

अब सभी की निगाहें 22 जुलाई को होने वाली अगली ट्रस्ट बैठक और SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की जिम्मेदारियां तय होंगी और ट्रस्ट में नए सदस्यों की नियुक्ति पर भी फैसला लिया जाएगा।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक बयानों और आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। “लापरवाही” बनाम “जिम्मेदारी” संबंधी प्रश्न विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।)

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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