G+4 PG बिल्डिंग में शॉर्ट सर्किट के बाद फैला जहरीला धुआं, 100 से अधिक लोगों को रेस्क्यू किया गया। मकान मालिक और लीज धारक हिरासत में, लापरवाही पर उठे बड़े सवाल।
नोएडा/मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में लगी आग की खबर अभी शांत भी नहीं हुई थी कि इसी बीच उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-66 में मंगलवार को एक भीषण अग्निकांड ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। शुरुआती जांच के अनुसार, पांच मंजिला (G+4) इमारत की ग्राउंड फ्लोर पार्किंग में ई-स्कूटर की बैटरी चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट से आग भड़क गई। देखते ही देखते पार्किंग में खड़े पेट्रोल वाहनों ने भी आग पकड़ ली और जहरीला धुआं पूरी इमारत में फैल गया। दम घुटने से एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई।
इस दर्दनाक हादसे में मुजफ्फरपुर के चक्कर चौक निवासी अश्वनी कुमार वर्मा की पुत्री स्नेहा वर्मा की भी जान चली गई। स्नेहा नोएडा में एक बीपीओ कंपनी में नौकरी करती थीं और इसी PG बिल्डिंग में रह रही थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही मुजफ्फरपुर में शोक की लहर दौड़ गई। इसके पहले प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में लगी आग ने लगभग 9 लोगों की मौत हो चुकी है।
यह इमारत PG के रूप में संचालित हो रही थी, जहां करीब 50 परिवार और बड़ी संख्या में नौकरीपेशा युवक-युवतियां रह रहे थे। आग के बाद पूरे भवन में धुआं भर गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों में मदद की गुहार लगाने लगे।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 7 गाड़ियां और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म मौके पर पहुंचे। सामने की इमारत से सीढ़ियां लगाकर 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों के मुफ्त इलाज के निर्देश दिए हैं। वहीं फेज-3 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर मकान मालिक और लीज धारक को हिरासत में ले लिया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि भवन में अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
बड़े सवाल
क्या PG भवन में फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद थे?
बेसमेंट/पार्किंग में ई-स्कूटर बैटरी चार्जिंग की अनुमति किसने दी?
क्या भवन में रहने वाले लोगों की संख्या क्षमता से अधिक थी?
अगर समय पर रेस्क्यू नहीं होता, तो क्या यह और बड़ा अग्निकांड बन सकता था?
यह हादसा एक बार फिर देशभर के PG, हॉस्टल और बहुमंजिला आवासीय भवनों में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।









