विद्या भारती के तत्वावधान में सात दिवसीय ‘क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग’ का भव्य समापन

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मुजफ्फरपुर | 15 जुलाई 2026
मुजफ्फरपुर: विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में सदातपुर स्थित भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में चल रहा सात दिवसीय “क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग” आज बुधवार, 15 जुलाई को अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

9 जुलाई से शुरू हुए इस गहन शैक्षणिक महाकुंभ में बिहार और झारखंड के विभिन्न शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालयों (रांची, भागलपुर और मुजफ्फरपुर) के प्राध्यापक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इस सात दिवसीय कार्यशाला के दौरान देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और आधुनिक तकनीकों के समन्वय पर व्यापक मार्गदर्शन दिया।

📌 सात दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग की मुख्य झलकियाँ:

🔹 9 जुलाई (उद्घाटन सत्र)
उद्घाटन: BRABU के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय द्वारा किया गया।
मुख्य विचार: उन्होंने कहा, “शिक्षक केवल विषय का ज्ञाता नहीं, बल्कि राष्ट्र का विधाता है”।
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष प्रो. रजनीश कुमार गुप्ता और विशिष्ट अतिथि माननीय प्रकाश चंद्र जी ने भी मूल्यनिष्ठ व शोधपरक शिक्षण का आह्वान किया।

🔹 10 जुलाई
मुंगेर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) रंजीत कुमार वर्मा ने शिक्षा की गुणवत्ता और वैधानिक निकायों पर प्रकाश डाला।
लोक शिक्षा समिति बिहार के प्रदेश सचिव श्री रामलाल सिंह ने व्यक्तित्व निर्माण पर आदर्श शिक्षक के 5 मूल गुण बताए।
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. रजनी रंजन ने ‘क्रिया शोध’ (Action Research) की महत्ता समझाई।

🔹 11 जुलाई
क्षेत्रीय संयोजक प्रो. रमन कुमार त्रिवेदी ने समग्र शिक्षा पर विचार रखे।
वरिष्ठ शिक्षाविद श्री उमा शंकर पोद्दार ने तैत्तिरीय उपनिषद के ‘पंचकोश’ एवं ‘पंचपदी शिक्षण पद्धति’ को भारतीय शिक्षा की आत्मा बताया।
NIEPA, नई दिल्ली के डॉ. शंकर परिपल्ली ने 21वीं सदी के आदर्श शैक्षिक नेतृत्व और डिजिटल दक्षता पर व्याख्यान दिया।

🔹 12 जुलाई
श्री धरणीकांत पांडे के मार्गदर्शन में आचार्यों ने पंचपदी आधारित पाठ योजना और सूक्ष्म शिक्षण (माइक्रो टीचिंग) का व्यावहारिक अभ्यास किया।
नालंदा केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. राजेश्वर कुमार ने ‘बहुभाषिक शिक्षा’ तथा लखनऊ के प्रो. सुभाष मिश्र ने डिजिटल प्लेटफॉर्म (MOOCs, SWAYAM) के उपयोग पर विशेष सत्र लिया।

🔹 13 जुलाई
क्षेत्र संगठन मंत्री माननीय ख्याली राम जी ने “संघ, विद्या भारती एवं हमारा लक्ष्य” विषय पर संगठनात्मक मार्गदर्शन दिया।
इसके बाद आचार्यों के लिए एक शैक्षिक व सांस्कृतिक अध्ययन-भ्रमण आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने वैशाली गढ़, वैशाली स्तूप और जापानी मंदिर का ऐतिहासिक अवलोकन किया।

🔹 14 जुलाई
डॉ. रजनीश ने शिक्षकों के लिए ‘तनाव प्रबंधन एवं भावनात्मक संतुलन’ पर व्यावहारिक उपाय बताए।
कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में मानवीय मूल्यों और तकनीक के संतुलन पर जोर दिया।
अंतिम तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री के. एन. रघुनंदन ने ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ पुस्तक का संदर्भ देते हुए राष्ट्र निर्माण व वास्तविक इतिहास बोध में शिक्षक की भूमिका को रेखांकित किया।

भव्य समापन सत्र (15 जुलाई)
सातवें व अंतिम दिन के समापन सत्र में ‘शिक्षा की अर्थव्यवस्था’ पर गंभीर विमर्श हुआ।
मुख्य वक्ता: भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. सुकन पासवान (प्रज्ञा चक्षु) ने अपना बौद्धिक पाथेय सभी प्रतिभागियों को दिया, जिसके बाद दोपहर में इस सात दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग की भव्य पूर्णाहुति हुई।

अतिथि सत्कार: समापन सत्र में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं प्रतिभागियों द्वारा वंदना की गई। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के सचिव डॉ. अमर बहादुर शुक्ल ने अतिथि परिचय एवं सम्मान कराया।
प्रतिभागियों के अनुभव: विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागियों—झारखंड से निकिता मेहता, दक्षिण बिहार से राजीव शुक्ला और उत्तर बिहार से सतीश चंद्र ने अपने अनुभव साझा किए।

इस 7 दिवसीय बैठक में हुए विचार-विमर्श, मूल उद्देश्य, उपस्थित सदस्यों के नाम, सभी चर्चाओं का क्रम, और लिए गए अंतिम फैसले को भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष: कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती बिहार के माननीय संगठन मंत्री श्री ख्यालीराम जी ने अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के सह-सचिव डॉ. ललित किशोर ने की तथा आभार ज्ञापन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रजनीश कुमार गुप्ता द्वारा किया गया।
मंच संचालन: लोक शिक्षा समिति, बिहार के विभाग निरीक्षक श्री राजेश रंजन जी ने कुशल मंच संचालन किया।

‘विकसित भारत-2047’ का संकल्प
इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत “वन्दे मातरम्” का गायन किया। इस प्रशिक्षण वर्ग से आचार्यों ने संकल्प लिया कि वे यहाँ सीखे गए कौशल, तकनीकी ज्ञान और भारतीय जीवन मूल्यों को अपने-अपने संस्थानों में धरातल पर उतारकर ‘विकसित भारत-2047’ के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे।

Sandeepak Kumar
Author: Sandeepak Kumar

संदीपक कुमार, पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव। ई टीवी से कैरियर की शुरुआत की। महुआ, कशिश न्यूज़,न्यूज 29 जैसे चैनल में बतौर पैनल प्रोड्यूसर और पीसीआर हेड के तौर पर काम किया। रायपुर आईबीसी 24, चंडीगढ़ न्यूज 18 में सीनियर प्रोड्यूसर कार्यरत रहे। कंटेंट डिजायनर के साथ ही स्क्रिप्ट राइटिंग, पैनलिंग और डिजिटल में कार्य का भी अनुभव रहा है।

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