मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक पर बन रहे चंदवारा पुल की गुणवत्ता पर सवाल, जांच के बाद ठेकेदार दो साल के लिए प्रतिबंधित

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बड़ा सवाल! क्या मुजफ्फरपुर में 43 करोड़ और 12 साल में भी अर्धनिर्मित चंदवारा पुल में सरकार का पैसा स्वाहा हो गया?

मुजफ्फरपुर/खबर जिन्दगी: बूढ़ी गंडक नदी पर जगन्नाथ मिश्रा कॉलेज के निकट सोडा गोदाम चौक और अहियापुर के बीच निर्माणाधीन उच्चस्तरीय आरसीसी पुल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षण में पुल के कुछ हिस्सों में क्षति, स्टील के दिखाई देने और गर्डर में हेयरलाइन क्रैक मिलने की बात दर्ज की गई। जांच के बाद संबंधित निर्माण एजेंसी को दो वर्षों के लिए निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित कर दिया गया है।

उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार, पुल एवं पहुंच पथ का निर्माण कार्य M/s Ganesh Ram Dokania को आवंटित किया गया था। 4 जुलाई 2026 को वरीय गुण नियंत्रण अभियंता, गुण नियंत्रण कोषांग, पटना की ओर से संयुक्त निरीक्षण किया गया।

निर्माण में मिली अनियमितता?
निरीक्षण के दौरान पुल की कुछ रेलिंग क्षतिग्रस्त पाई गई। इसके अलावा P10 के Shaft Cap और Well Cap में स्टील दिखाई देने की बात रिपोर्ट में दर्ज की गई है।
जांच में P11-A2 Girder तथा P10-P11 Girder में Hair Cracks भी देखे गए। साथ ही सभी स्पैन में उचित Drainage व्यवस्था नहीं होने की बात भी निरीक्षण में सामने आई। Rebound Hammer Test (हथौड़े से परीक्षण) के परिणाम निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं पाए गए।

गुणवत्ता जांच के बाद डिबारमेंट की कार्रवाई
निरीक्षण में दर्ज कमियों के आधार पर वरीय गुण नियंत्रण अभियंता, गुण नियंत्रण कोषांग, पटना ने 11 जुलाई 2026 को संबंधित संवेदक को अगले दो वर्षों के लिए डिबार(प्रतिबंधित) करने की अनुशंसा की। लेकिन इस अनुशंसा के बाद विभाग की ओर से संवेदक से स्पष्टीकरण मांगा गया। संवेदक ने 18 जुलाई 2026 को अपना जवाब प्रस्तुत किया।

विभागीय प्रक्रिया के तहत संवेदक के स्पष्टीकरण पर उप मुख्य अभियंता, कार्य अंचल-1, पटना और वरीय परियोजना अभियंता, कार्य प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से मंतव्य एवं अनुशंसा मांगी गई। उप मुख्य अभियंता, कार्य अंचल-1, पटना ने संवेदक के स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं करते हुए दो वर्ष के लिए डिबार करने की अनुशंसा की।

इसके बाद 27 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार संवेदक M/s Ganesh Ram Dokania को 27 जुलाई 2026 से 26 जुलाई 2028 तक निविदाओं में भाग लेने से वंचित/डिबार कर दिया गया।

पुल की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर पुल की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब निरीक्षण रिपोर्ट में गर्डर में Hair Cracks, कुछ हिस्सों में खुले स्टील और ड्रेनेज से जुड़ी कमियां दर्ज की गई हैं। इन सब कमियों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माणाधीन पुल की वर्तमान संरचनात्मक की भार-वहन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन किया गया है या नहीं?

यदि गर्डर में दर्ज दरारें केवल सतही हैं तो इनमें संरचनात्मक प्रभाव की संभावना है या नहीं और उसका समाधान क्या है?

स्वतंत्र Structural Safety Audit की मांग
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पुल के सुरक्षित होने की स्वतंत्र जांच किसी विशेषज्ञ तकनीकी संस्थान या स्वतंत्र एजेंसी से कराई गई है।

एक स्वतंत्र Structural Safety Audit से यह स्पष्ट हो सकता है कि निरीक्षण में दर्ज कमियों का पुल की दीर्घकालिक मजबूती पर कितना प्रभाव पड़ता है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ऐसे किसी स्वतंत्र ऑडिट की पुष्टि नहीं है। इसलिए इस संबंध में विभाग से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

पुराने बिल और Measurement Book पर सवाल
निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच में कमियां सामने आने के बाद एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा Measurement Book (MB) और Running Account Bills से जुड़ा है। सवाल यह है कि जिन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, उनके पूर्व के कार्यों का मापन किस आधार पर सत्यापित किया गया और भुगतान प्रक्रिया में किन स्तरों पर जांच की गई? यह जानकारी सामने आना भी महत्वपूर्ण है कि परियोजना के तहत संवेदक को अब तक कुल कितनी राशि का भुगतान किया जा चुका है।

क्या सरकार वसूली और वित्तीय कार्रवाई भी करेगी?
सिर्फ डिबारमेंट की कार्रवाई के अलावा यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि यदि तकनीकी जांच में निर्माण में कमी की पुष्टि होती है तो Rectification Cost, Penalty या अन्य वित्तीय दायित्व किसके ऊपर तय किया जाएगा।
साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि संवेदक की Performance Security या Security Deposit के संबंध में विभाग ने क्या निर्णय लिया है।

निरीक्षण में मिले खुले स्टील और क्षतिग्रस्त रेलिंग और गर्डर की दरारों की गहराई की जांच की बात सामने आने के बाद राहगीरों के लिए सबसे अहम मुद्दा तत्काल सुधार कार्य है। क्या इन हिस्सों की मरम्मत करा दी गई है? यदि मरम्मत हो चुकी है तो किस तकनीकी मानक के तहत की गई और इसकी गुणवत्ता की दोबारा जांच किस अधिकारी या एजेंसी ने की? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

ड्रेनेज व्यवस्था पर भी ध्यान जरूरी
निरीक्षण में सभी स्पैन में उचित Drainage Spot नहीं होने की बात दर्ज की गई है। पुल की जल निकासी व्यवस्था लंबे समय में संरचना की सुरक्षा और रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या अब सभी स्पैन में निर्धारित Drainage व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है और उसकी तकनीकी जांच पूरी हुई है।

विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल?
ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ एक बड़ा प्रशासनिक सवाल निगरानी व्यवस्था को लेकर भी है।
यदि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता से जुड़ी कमियां मौजूद थीं और बाद में निरीक्षण में सामने आईं, तो निर्माण की निगरानी करने वाले विभागीय अभियंताओं की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। साथ ही निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण, मापन, भुगतान और साइट निरीक्षण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं।

मुजफ्फरपुर के इस निर्माणाधीन पुल का मामला केवल एक ठेकेदार के प्रतिबंध या निविदा से हटाने तक सीमित नहीं है। यह सरकारी निर्माण की गुणवत्ता, सार्वजनिक धन के उपयोग और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। विभागीय निरीक्षण में दर्ज तकनीकी कमियों के बाद ठेकेदार पर कार्रवाई हुई है, लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन पुल की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति को लेकर क्या तकनीकी कदम उठाता है। साथ ही संवेदक के अलावा उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिरेगी जो पुल निर्माण के निरीक्षण का कार्य देख रहे थे।

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