बिहार में रिश्वतखोरी पर बड़ा एक्शन! एक ही दिन तीन सरकारी कर्मियों पर निगरानी का शिकंजा, ₹45 हजार लेते पकड़े गए

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सरकार के वेतन से अधिकारियों और कर्मचारियों का पेट नहीं भरता इसलिए जरूरत पूरी करने को लेते हैं रिश्वत

पटना/शेखपुरा/जहानाबाद (खबर जिन्दगी): बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ और रिश्वत पर प्रहार को लेकर मंगलवार 8 सितंबर को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई एक साथ कई जिलों में देखने को मिली। निगरानी विभाग की अलग-अलग कार्रवाई में शेखपुरा, जहानाबाद और पटना से जुड़े तीन सरकारी कर्मियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। तीनों मामलों में कुल ₹45,000 की कथित रिश्वत की कार्रवाई बताई गई है।

इन कार्रवाइयों में जिला परिवहन कार्यालय के एक निम्न वर्गीय लिपिक, जहानाबाद सदर प्रखंड में मनरेगा से जुड़े एक कनीय अभियंता और पटना के दीघा यातायात थाना में पदस्थापित एक सब-इंस्पेक्टर का नाम सामने आया है।

शेखपुरा में परिवहन कार्यालय के लिपिक धराए

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया जिला परिवहन कार्यालय, शेखपुरा से कुणाल कुमार, निम्न वर्गीय लिपिक को उनके कार्यालयीय कक्ष से ₹15,000 के साथ रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। निगरानी की धावादल टीम ने यह कार्रवाई की। मामले में रिश्वत की मांग और उसके बाद की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

मनरेगा के कनीय अभियंता पर शिकंजा

दूसरी बड़ी कार्रवाई जहानाबाद सदर प्रखंड में मनरेगा से जुड़े कनीय अभियंता अमन कुमार के खिलाफ हुई। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुताबिक, जहानाबाद के अम्बेदकर चौक के पास स्थित एक ढाबे से अमन कुमार को ₹20,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। निगरानी विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि 7 सितंबर को इस मामले में निगरानी थाना कांड संख्या 105/26 दर्ज किया गया था।

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना में रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत जामुक में मनरेगा के तहत करीब ₹6,77,790 की लागत वाली तीन योजनाओं का काम पूरा होने के बाद उनकी मापी पुस्तिका के सत्यापन के एवज में कथित तौर पर 3 प्रतिशत रिश्वत की मांग की जा रही थी। जिसके बाद निगरानी ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया जिसमें रिश्वत की मांग किए जाने की पुष्टि हुई और उसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई के लिए धावादल गठित किया गया था।

निगरानी विभाग के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जाएगी और उसे विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मामले में आगे की जांच जारी है।

पटना में यातायात थाना से सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार

तीसरी कार्रवाई राजधानी पटना में बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम द्वारा यातायात थाना दीघा से सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र कुमार साह को 8 सितंबर को ₹10,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

एक ही दिन में तीन कार्रवाई से बढ़ी हलचल

बिहार में एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों पर निगरानी विभाग की इन कार्रवाइयों ने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर काफी चर्चा हो रही है। इन तीन मामलों में सामने आई कथित रिश्वत की राशि को जोड़ें तो कुल ₹45,000 की रकम का उल्लेख है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इन कार्रवाइयों से एक बात साफ है कि रिश्वत की शिकायतों पर विभाग द्वारा सत्यापन और कानूनी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। अब इन मामलों की आगे की जांच और न्यायालय में होने वाली कार्यवाही पर नजर रहेगी।

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