
जमुई, बांका और समस्तीपुर की घटना से बिहार की कानून व्यवस्था पर उठे सवाल..
बिहार में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जमुई, समस्तीपुर और बांका की घटनाओं के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपनी ही गठबंधन सरकार पर सवाल उठाए। पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर उठ रहे सवालों पर पढ़िए ये पूरी रिपोर्ट।
पटना/खबर जिन्दगी: महिलाओं और नाबालिग लड़कियों से जुड़े लगातार सामने आ रहे उत्पीड़न के मामलों ने बिहार की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जमुई, समस्तीपुर और बांका में सामने आए वीडियो के बाद बिहार में आक्रोश देखा जा रहा है। इन घटनाओं के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने अपनी ही गठबंधन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
27 सितंबर 2026 को दिए गए एक मीडिया इंटरव्यू के हवाले से रिपोर्टों में चिराग पासवान के बयान को प्रकाशित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध की घटनाओं को देखकर उन्हें ऐसी सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है।
जमुई की घटना से उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
19 सितंबर को जमुई में कोचिंग से लौट रहे कक्षा 10 के छात्र और छात्रा को कथित तौर पर युवकों के एक समूह ने रोक लिया। दोनों के साथ मारपीट और छात्रा से कथित छेड़छाड़ का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया।
पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। रिपोर्टों के अनुसार कई आरोपियों की पहचान की गई और गिरफ्तारियां हुईं। प्राथमिकी में दर्ज मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी। मामले में POCSO और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच पड़ताल कर रही है।
समस्तीपुर से भी दरिंदगी का वीडियो आया सामने
जमुई की घटना के कुछ ही दिनों बाद समस्तीपुर से एक और वीडियो सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, एक लड़की को युवकों के एक समूह ने सड़क पर रोककर कथित तौर पर परेशान किया और उसके साथ अभद्रता की। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है।
बांका मामले ने बढ़ाई चिंता
बांका के मंदार क्षेत्र से भी सितंबर में कथित महिला उत्पीड़न का वीडियो सामने आया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को 22 सितंबर को वीडियो की जानकारी मिली। मामला सामने आने के बाद घटना की जांच शुरू की गई। जांच रिपोर्ट में घटना को लेकर कई युवकों द्वारा कथित तौर पर लड़की के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट का उल्लेख है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांका का मंदार पर्वत अंग क्षेत्र का एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।इससे सार्वजनिक और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं।
कार्रवाई के बाद भी बड़ा सवाल निगरानी का
पुलिस की ओर से गिरफ्तारियां और जांच की कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इन घटनाओं के बाद मूल सवाल केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। क्या पुलिस की मौजूदगी और निगरानी इतनी प्रभावी है कि ऐसी घटनाओं को शुरुआती स्तर पर रोका जा सके?
क्या संवेदनशील इलाकों, सुनसान सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त पेट्रोलिंग हो रही है? क्या सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ही पुलिस तंत्र सक्रिय होता है, या अपराध रोकने के लिए पहले से प्रभावी निगरानी व्यवस्था मौजूद है?
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पुलिस पेट्रोलिंग का तो अजब हाल है। यहां पुलिस थाने में आराम फरमाती है और पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी पर शहर के कुत्तों का कब्जा रहता है।
चिराग पासवान का बयान राजनीतिक दबाव का बड़ा संकेत
चिराग पासवान की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनकी पार्टी लोजपा (आर) बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में सरकार के सहयोगी दल के प्रमुख नेता द्वारा ही कानून-व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताना राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
वहीं, विपक्षी नेताओं ने भी इन घटनाओं को लेकर सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। हालांकि सरकार और पुलिस की ओर से कई मामलों में त्वरित कार्रवाई, गिरफ्तारी और जांच की जानकारी भी सामने आई है।
महिला सुरक्षा पर सरकार तय करे जवाबदेही
बिहार में सामने आए इन मामलों ने महिला और बाल सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सामने कई चुनौतियां रख दी हैं। गिरफ्तारी के बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन उससे भी अहम है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस पेट्रोलिंग, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, शिकायत पर तत्काल प्रतिक्रिया और पीड़ितों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
चिराग पासवान का बयान इसी व्यापक सवाल को राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है। अगर सरकार के भीतर से ही कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, तो महिला सुरक्षा की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती केवल मामलों में कार्रवाई करना नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर भरोसा मजबूत करना भी है।










