राजनीति के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने भगवान को बांटा; “शिव” कांग्रेस के और “राम” BJP के आराध्य

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Advertisements
ad

हिंदू भगवान पर रेवंत रेड्डी का विवादास्पद बयान, सियासत तेज; SIR के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की अपील

तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी के राम-शिव पर बयान से सियासत तेज हो गई है। BJP ने पलटवार किया, वहीं SIR के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की अपील ने विवाद बढ़ा दिया।

नई दिल्ली: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भगवान राम और भगवान शिव बांटने के बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक कार्यक्रम में रेवंत रेड्डी से दक्षिण भारत में कांग्रेस की लोकप्रियता पर सवाल किया गया था। जिसपर बोलते हुए रेड्डी ने हिंदू भगवानों शिव और राम का उदाहरण दिया, जिसमें उन्होंने शिव को दक्षिण भारत में लोकप्रिय और राम को अमीरों की पार्टी का बता दिया

रेड्डी ने कहा कि भाजपा ने भगवान राम को अपने राजनीतिक मुद्दा का हिस्सा बना लिया है, जबकि दक्षिण भारत में भगवान शिव की आस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कांग्रेस और भाजपा की राजनीति की तुलना की। उन्होंने दावा किया कि “शिव गरीबों के भगवान हैं और राम अमीरों के भगवान हैं” और भाजपा को अमीरों की पार्टी बताया।

रेड्डी ने यह भी कहा कि भाजपा के मंचों से “जय श्री राम” का नारा सुनाई देता है, जबकि “हर हर महादेव” को लेकर उन्होंने सवाल उठाया। उनके इन बयानों पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक विभाजन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने रेड्डी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि भगवान राम और भगवान शिव के बीच राजनीतिक विभाजन की रेखा खींचना उचित नहीं है।

उत्तर-दक्षिण की राजनीति का भी जिक्र

रेड्डी ने अपने बयान में उत्तर और दक्षिण भारत की राजनीतिक-सामाजिक पहचान का भी उल्लेख किया। उनका तर्क था कि दक्षिण भारतीय राज्यों में शिव की आस्था और स्थानीय पहचान कांग्रेस की राजनीति से जुड़ती है, जबकि उत्तर भारत में भाजपा ने भगवान राम से जुड़े प्रतीकों को अपने राजनीतिक अभियान में प्रमुख स्थान दिया है।

हालांकि, रेड्डी का यह बयान भी राजनीतिक फिजाओं में वैसे ही शोर करता रहेगा जैसे कि उन्होंने कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी और भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। इन दावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं और भाजपा ने रेड्डी के बयान की आलोचना की है।

SIR पर विपक्ष को एकजुट होने की अपील

इसी कार्यक्रम SIR पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में रेड्डी ने Special Intensive Revision को लेकर भी विपक्षी दलों को एकजुट होने की अपील की। उन्होंने ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और एमके स्टालिन सहित कई विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर “SIR गो बैक” अभियान चलाने का सुझाव दिया।

SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और नामों के सत्यापन जैसे मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि प्रक्रिया कानून के तहत की जा रही है और अंतिम निर्णय पूरे आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

यहां एक बात उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के ही दूसरे नेता पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने SIR की प्रक्रिया को सही बताया है। चुनाव आयोग द्वारा SIR के तहत मतदाता सूची से नाम काटने की प्रक्रिया को गलत बताया है।

चुनाव आयोग के फैसलों पर विवाद

SIR का मुद्दा फिर से उछलने का विवाद उस समय उभर आया जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने कई मौकों पर आयोग के फैसलों से जुड़े मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 14 फैसलों पर ऐसी आपत्तियां दर्ज की गईं।

इसके बाद चुनाव आयोग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि SIR के मुद्दे पर सारे चुनाव आयुक्तों की राय एक है। डेप्युटेशन और अन्य तरीकों से भर्ती किए गए कर्मचारियों को लेकर आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया है। पिछले एक वर्ष में आयोग द्वारा लिए गए फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत स्वीकृति से लिए गए।

कांग्रेस की आगे की रणनीति पर नजर

SIR का मुद्दा उठाने के बावजूद कांग्रेस को बेहतर सफलता नहीं मिल पाई है। जिसके बाद वह और अन्य विपक्षी पार्टियां अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध की आगामी रणनीति पर भी चर्चा करती नजर आ रही है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन और राजनीतिक अभियान के जरिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

इस पूरे विवाद में एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया और पूर्ण आयोग की मंजूरी के अनुरूप बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है।

Telangana Chief Minister divides deities politics; “Shiva” belongs Congress “Ram” worshipped BJP.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Advertisements